पुणे में 4,427 करोड़ रुपये के संदिग्ध विदेशी लेनदेन मामले में दो CA पर FIR, आयकर विभाग और पुलिस की जांच तेज

Pune Crime News: पुणे में ₹4,427 करोड़ विदेश भेजने और फर्जी प्रमाण पत्र बनाने के आरोप में आयकर विभाग की शिकायत पर दो सीए के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस व IT जांच में जुटे।
FIR against two CAs in Pune in a case involving suspicious foreign transactions worth ₹4,427 crore
पुणे सीए फर्जी , प्रतीकात्मक तस्वीरसोर्स- सोशल मीडिया
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Pune CA Fake 15CA 15CB Certificate Foreign Remittance FIR: पुणे शहर में 4,427 करोड़ 92 लाख रुपये की रकम विदेश भेजने, कथित कर चोरी और फर्जी प्रमाण पत्रों के इस्तेमाल के आरोपों ने पुणे के आयकर विभाग और पुलिस की जांच का दायरा बढ़ा दिया है। तीन कंपनियों के विदेशी लेनदेन में कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज और 15 सीए-15सीबी प्रमाण पत्र तैयार करने के आरोप में दो चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) के खिलाफ कोंढवा-येवलेवाड़ी पुलिस ने मामला दर्ज किया है।

आयकर विभाग की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और इसकी जांच सहायक पुलिस निरीक्षक चेतन मोरे कर रहे हैं। आरोप है कि चार वर्षों के दौरान तीन कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए आरोपियों ने विदेश में बड़ी रकम भेजने में मदद की।

आरोपी 4 वर्ष तक लगाते रहे चूना

मामले में एमएस ओडी एंड एसोसिएट्स फर्म से जुड़े अंकुशकुमार सुरेशचंद बागरेचा (34) और मोहित शिवकुमार तोडी (33) के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है। आयकर विभाग की शिकायत के अनुसार, 2022 से सितंबर 2026 के बीच आरोपियों ने तीन कंपनियों से जुड़े लेन-देन के दस्तावेज तैयार किए।

शिकायत में आरोप है कि विदेश में रकम भेजने के लिए आवश्यक 15 सीबी प्रमाणपत्र तैयार किए गए और उन्हें वास्तविक दस्तावेज के तौर पर आयकर विभाग के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

शिकायत के अनुसार, इन दस्तावेजों के आधार पर चार वर्षों में कुल 4,427 करोड़ 92 लाख 44 हजार 408 रुपये विदेश भेजे गए।

पुणे शहर के आयकर विभाग अब यह जांच कर रहा है कि इन लेन-देन में वास्तविक कारोबारी गतिविधियां कितनी थीं और कर देनदारी से बचने के लिए दस्तावेजों का किस तरह इस्तेमाल किया गया।

जांच एजेंसियां बैंक खातों से जुड़े रिकॉर्ड की भी कर रहीं पड़ताल

आयकर विभाग की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने 15 सीए फॉर्म भी तैयार कर विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किए। शिकायत में यह भी कहा गया है कि कुछ मामलों में आरोपियों के पास ऐसे फॉर्म तैयार करने का अधिकार नहीं था।

पुलिस और आयकर विभाग अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि किन कंपनियों के नाम पर कितने लेनदेन हुए और उनमें जारी किए गए प्रमाणपत्रों की वैधता क्या थी। विदेश में रकम भेजने से जुड़े लेन-देन में 15 सीए और 15 सीबी महत्वपूर्ण दस्तावेज होते हैं। इसलिए जांच एजेंसियां संबंधित कंपनियों के बैंक खातों, भुगतान विवरण, कर दस्तावेजों और सीए फर्म से जुड़े रिकॉर्ड की भी पड़ताल कर रही है।

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शेल कंपनियों के जरिए भेजी गई रकम

आयकर विभाग के सूत्रों के अनुसार, मामले में कथित शेल कंपनियों के इस्तेमाल की भी जांच की जा रही है। आयकर विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक कुछ रकम हॉन्गकॉन्ग और दुबई सहित विदेशों में भेजी गई।

कुछ लेन-देन को शिपिंग सेवाओं, कमीशन अथवा अन्य व्यावसायिक भुगतान के रूप में दिखाए जाने की जानकारी सामने आई है। विभाग के जांच में सामने आया है कि जिन सेवाओं के बदले भुगतान दिखाया गया, वे वास्तव में प्रदान की ही नहीं गई थीं,

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