पार्थ पवार पर लटकी गिरफ्तारी की तलवार! FIR में जुड़ेगा नाम, 21 करोड़ का जुर्माना भरने का आदेश
Parth Pawar FIR News: बॉम्बे HC ने पार्थ पवार मामले में पुणे पुलिस की मंशा पर सवाल उठाए। कोर्ट की फटकार के बाद जमीन विवाद मामले की FIR में पार्थ के नाम जोड़ने की तैयारी, गिरफ्तारी संभावना बढ़ी।
- Written By: आकाश मसने
अजित पवार के साथ पार्थ पवार (सोर्स: सोशल मीडिया)
Pune Land Scam Case Parth Pawar News: महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उन पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। क्योंकि मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को मामले का जांच कर रही पुणे की मुंढवा पुलिस की मंशा पर ही बुधवार को सवाल खड़े कर दिए थे।
न्यायाधीश माधव जामदार की एकल पीठ ने पुलिस और राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि क्या उपमुख्यमंत्री अजित पवार के पुत्र होने की वजह से पार्थ को बचाने का प्रयास किया जा रहा है? कोर्ट की फटकार के बाद पुणे पुलिस ने एफआईआर में पार्थ का नाम जोड़ने की तैयारी शुरू कर दी है और ऐसा दावा किया जा रहा है कि यदि पार्थ का नाम एफआईआर में जुड़ता है तो उनकी गिरफ्तारी की संभावना प्रबल हो जाएगी।
क्या है जमीन विवाद?
यह विवाद पुणे के मुंढवा इलाके में स्थित महार वतन श्रेणी की 40 एकड़ सरकारी जमीन से जुड़ा है, जिसे बेचा ही नहीं जा सकता था। लेकिन लगभग 1800 करोड़ रुपए की जमीन महज 300 करोड़ रुपए में अमेडिया इंटरप्राइजेज एलएलपी नाम की फर्म को बेच दी गई। अमेडिया में पार्थ पवार 99 प्रतिशत के साझेदार हैं।
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कंपनी ने 20 मई 2025 को यह जमीन खरीदी थी और राज्य सरकार की 1 फरवरी 2024 की अधिसूचना के तहत डेटा सेंटर प्रोजेक्ट के लिए स्टांप ड्यूटी में छूट ली थी। लेकिन इस सौदे के सिर्फ दो दिन बाद ही 21 करोड़ की स्टांप ड्यूटी माफ कर दी गई और कंपनी ने सिर्फ 500 रुपए बतौर स्टांप ड्यूटी चुकाई थी।
21 करोड़ के भुगतान का आदेश
मामला उजागर होने पर पार्थ पवार ने सौदा रद्द करने की घोषणा की और इसी आधार पर 21 करोड़ रुपये का भुगतान करने से इनकार कर दिया। लेकिन पुणे के सब रजिस्ट्रार ने नियमों के तहत कंपनी को 21 करोड़ रुपए स्टांप ड्यूटी और जुर्माना भरने का आदेश दिया था। पार्थ पवार ने इस मामले में कोर्ट से राहत मांगी, लेकिन कोर्ट ने उन्हें राहत देने से साफ इनकार कर दिया।
कोर्ट की कड़ी फटकार
संयुक्त पंजीकरण महानिरीक्षक (आईजीआर) की अध्यक्षता वाली समिति ने कारोबारी दिग्विजय पाटिल, शीतल तेजवानी और उप-पंजीयक रविंद्र तारू पर जिम्मेदारी तय की और इन्हें एफआईआर में शामिल किया। लेकिन जस्टिस माधव जामदार की एकल पीठ ने कारोबारी शीतल तेजवानी की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान एफआईआर में पार्थ का नाम नहीं होने पर कड़ा ऐतराज जताया।
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अधिकारियों ने बताया कि उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार का नाम किसी भी दस्तावेज में नहीं होने के कारण उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई। लेकिन कोर्ट ने तर्क स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया। इस मामले को लेकर सरकार पर जमकर हमला बोला है। कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने हाईकोर्ट के जज से न्यायिक जांच की मांग की है।
क्या बोले सीएम फडणवीस?
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सरकार किसी को बचा नहीं रही है और कानून के अनुसार कार्रवाई होगी। एफआईआर में नाम होने भर से कोई दोषी नहीं हो जाता है और इसी तरह नाम नहीं होने से कोई निर्दोष भी नहीं होता है।
