पिंपरी चिंचवड महानगरपालिका भवन फोटो, सोर्स- सोशल मीडिया
Pimpri Chinchwad Smart City Project: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘स्मार्ट सिटी परियोजना’ अब पिंपरी-चिंचवड़ महानगर पालिका (पीसीएमसी) के लिए एक बड़ी आर्थिक और प्रशासनिक चुनौती बन गई है।
पिंपरी-चिंचवड़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड कंपनी के आगामी 31 मार्च को बंद होने के बाद, इसकी सभी अधूरी और पुरानी परियोजनाओं का उत्तरदायित्व महानगर पालिका के कंधों पर आ जाएगा। इस हस्तांतरण के कारण मनपा के खजाने पर भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा, जिसे वहन करने के लिए अब प्रशासन को अपने आंतरिक संसाधनों पर निर्भर रहना होगा।
शहर की बुनियादी सुविधाओं के विकास के नाम पर शुरू की गई इस योजना में लगभग 650 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित था। लेकिन भारी-भरकम धनराशि खर्च करने के बावजूद कई 5 परियोजनाएं या तो बीच में ही लटक गई या समय के साथ अपनी प्रासंगिकता खो चुकी हैं। इस विफलता का सबसे बड़ा न प्रमाण शहर की सुरक्षा व्यवस्था में देखने को मिलता है।
स्मार्ट सिटी अभियान के तहत लगाए इ गए 5,375 सीसीटीवी कैमरों में से अधिकांश वर्तमान में बंद पड़े हैं। इसके अतिरिक्त, इनसे जुड़ा ‘इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर’ भी अपनी कुल क्षमता का महज 40 प्रतिशत ही संचालित हो पा रहा है। परिणामस्वरूप, ट्रैफिक नियंत्रण और स्मार्ट पार्किंग जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं
पूरी तरह निष्प्रभावी साबित हो रही हैं।
तकनीक के तेजी से बदलते दौर में इस प्रोजेक्ट के तहत स्थापित वीडियो मैनेजमेंट सिस्टम, सीसीटीवी कैमरे और एलईडी टीवी जैसे उपकरण अब पुराने (आउटडेटेड) हो चुके हैं। इन प्रणालियों की मरम्मत और रखरखाव के लिए अब महानगरपालिका को अतिरिक्त करोड़ों रुपये खर्च करने होंगे।
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