अजित पवार के बाद अधूरा रहा विलय मुद्दा फिर गरमाया, शेलके ने जताई एकता की उम्मीद
NCP Reunion: राष्ट्रवादी कांग्रेस के दोनों गुटों के विलय की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। विधायक सुनील शेलके ने सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में दोनों दलों के एक होने की संभावना जताई है।
- Written By: अपूर्वा नायक
सुनील शेलके (सौ. सोशल मीडिया )
NCP Merger Talk Sunetra Pawar Leadership: स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के चुनाव के दौरान दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने दोनों राष्ट्रवादी कांग्रेस के विलय को लेकर चर्चा शुरू की थी।
लेकिन उनके अचानक विमान दुर्घटना में निधन के बाद यह मुद्दा अधूरा रह गया। कुछ समय तक इस विषय पर चर्चा जरूर तेज रही, लेकिन दोनों पक्षों की ओर से ठोस पहल न होने के कारण यह मामला ठंडा पड़ गया। अब एक बार फिर इस मुद्दे ने जोर पकड़ लिया है।
दोनों राष्ट्रवादी कांग्रेस गुटों के विलय की संभावना
विधायक सुनील शेलके ने दोनों राष्ट्रवादी कांग्रेस कांग्रेस गुटों गुटों के विलय की संभावना जताते हुए कहा है कि अभी भी देर नहीं हुई है और यदि सकारात्मक कदम उठाए जाएं तो दोनों दल एक हो सकते हैं।
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सुनील शेलके ने भावुक होते हुए कहा कि वर्तमान में काम करते समय अजीत पवार की कमी बहुत महसूस हो रही है। वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि उनके उत्तराधिकारी के रूप में सुनेत्रा पवार को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि यदि उनके नेतृत्व में दोनों राष्ट्रवादी गुट एक होते हैं, तो यह स्वागत योग्य कदम होगा।
पार्टी में अंदरूनी विवाद से बढ़ीं सुनेत्रा की दिक्कतें
- इस बीच, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने राज्य में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का नेतृत्व संभाल लिया है। लेकिन पार्टी के कुछ नेताओं के विवादों के कारण उनके सामने चुनौतियां बढ़ती नजर आ रही है।
- रुपाली चाकणकर और नरहरी झिरवाल फिलहाल विवादों में घिरे हुए हैं, जिससे पार्टी की स्थिति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इन सभी घटनाक्रमों के बीच दोनों राष्ट्रवादी गुटों के विलय की चर्चा फिर से जोर पकड़ रही है।
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सभी की भूमिका जरूरी
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक सुनील शेलके ने कहा कि यदि सुनेत्रा पवार का नेतृत्व शरद पवार गुट के नेताओं को स्वीकार्य हो और दोनों दल एक साथ आते हैं, तो यह गर्व की बात होगी। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी का विस्तार हो रहा है, तो सभी को सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए। जिन नेताओं को सुनेत्रा पवार का नेतृत्व स्वीकार्य नहीं होगा, वे अन्य दलों का रुख कर सकते हैं। अगर उनके नेतृत्व में दोनों गुट एकजुट होते हैं, तो इससे उन्हें खुशी होगी।
