पुणे ट्रैफिक संकट: सिंहगढ़ रोड जाम से राहत के लिए नया प्लान, मुठा नदी किनारे बनेगा एलिवेटेड रोड

Mutha River Elevated Road Project: पुणे के सिंहगढ़ रोड पर बढ़ते ट्रैफिक जाम को कम करने के लिए मुठा नदी किनारे एलिवेटेड रोड बनाने का प्रस्ताव सामने आया है। पीएमसी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
pune-sinhagad-road-elevated-corridor-mutha-river-traffic
पुणे सिंहगढ़ रोड ट्रैफिक सॉल्यूशन प्लान (सौ. सोशल मीडिया )
Published on: 
Updated on: 

Pune Sinhagad Road Elevated Corridor: सिंहगढ़ रोड पर बढ़ते ट्रैफिक जाम की समस्या को कम करने के लिए बनाया गया फ्लाईओवर अब नाकाफी साबित हो रहा है। तेजी से हुए शहरीकरण और वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण इस मार्ग पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

इस समस्या के समाधान के रूप में अब पर्वती विधानसभा क्षेत्र के विठ्ठलवाडी से नांदेड़ सिटी तक मुठा नदी के किनारे एलिवेटेड रोड बनाने का प्रस्ताव सामने आया है। राज्य के नगर विकास विभाग ने इस संबंध में पुणे महानगर पालिका (पीएमसी) को विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। विधायक माधुरी मिसाल द्वारा मुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र और निरंतर की गई मांग के बाद इस प्रस्ताव को गति मिली है।

स्वारगेट से सिंहगढ़ के लिए एक ही सड़क पर निर्भरता

वर्तमान में स्वारगेट से सिंहगढ़ रोड की ओर जाने के लिए मुख्य रूप से एक ही सड़क उपलब्ध है। पिछले दो दशकों में राजाराम पुल से लेकर सिंहगढ़ पायथा तक बड़े पैमाने पर शहरीकरण हुआ है। इसके अलावा, पुणे-बेंगलुरु हाईवे से शहर में आने वाले वाहन भी इसी मार्ग का उपयोग करते हैं, जिससे यहां दिनभर भारी जाम की स्थिति बनी रहती है।

मनपा प्रशासन ने पुराने अनुभव से लिया सबक

हालांकि, मनपा ने मुठा नहर के किनारे पु ल देशपांडे गार्डन से फनटाइम सिनेमा तक एक वैकल्पिक मार्ग विकसित किया था, लेकिन यह मुख्य रूप से वडगांव बुद्रुक क्षेत्र के लिए ही सुविधाजनक है। धायरी, नहें, किरकटवाडी, नांदेड़ सिटी, खड़कवासला और डोणजे जाने वाले वाहनों को अभी भी मुख्य सड़क पर ही निर्भर रहना पड़ता है। करीब दस साल पहले मनपा ने विठ्ठलवाडी से वारजे पुल तक नदी के किनारे एक सड़क बनाई थी।

अदालत के आदेश पर सड़क को तोड़ना पड़ा

लेकिन पर्यावरण प्रेमियों के विरोध के बाद यह मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। अदालत ने इस सड़क को 'एलिवेटेड' बनाने के निर्देश दिए थे। निर्देशों का पालन न होने पर अवमानना याचिका दायर हुई।

अदालत के आदेश पर करीब 23 करोड़ रुपये की लागत से बनी सड़क को तोड़ना पड़ा था। इसी कड़वे अनुभव से सीख लेते हुए, अब प्रस्तावित सड़क को शुरू से ही एलिवेटेड बनाने की मांग की गई है, ताकि पर्यावरणीय संतुलन बना रहे और भविष्य में कोई कानूनी अड़चन न आए।

Navbharat Live
navbharatlive.com