

Maharashtra Land Rules Chandrashekhar Bawankule: महाराष्ट्र सरकार ने अवैध प्लाटिंग, भूमि की खरीद-फरोख्त में व्याप्त धोखाधड़ी और भू-अभिलेखों (लैंड रिकों) में बढ़ती अनियमितताओं के विरुद्ध अत्यंत कठोर रुख अपनाया है। राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने सोमवार को स्पष्ट किया कि अक्टूबर 2024 से पूर्व आवासीय क्षेत्रों में किए गए भूमि-विभाजन को सरकार नियमित करने पर विचार कर सकती है, लेकिन इसके पश्चात विना आधिकारिक 'लेआउट मंजूरी' के किसी भी प्लॉट की विक्री पूर्णतः अवैध मानी जाएगी।
पुणे में आयोजित एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए बावनकुले ने कहा कि शहर और इसके निकटवर्ती क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अनधिकृत प्लाटिंग कर किसानों की कृषि भूमि को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर बेचा जा रहा है। इसके लिए विभिन्न स्थानों पर कार्यालय खोलकर खुलेआम व्यवसाय चलाया जा रहा है। सरकार अब ऐसे कारोबारियों और भू-माफिया पर शिकंजा कसने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने चेतावनी दी कि अब भूमि के किसी भी खंड को बेचने से पूर्व संबंधित नगर पालिका, महानगर पालिका अथवा सक्षम प्राधिकरण की पूर्वानुमति अनिवार्य होगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध न केवल प्रशासनिक कार्रवाई होगी, बल्कि सीधे आपराधिक मामले दर्ज किए जाएंगे।
बावनकुले ने जानकारी दी कि सरकार ने 'गांवठाण' से 200 मीटर की परिधि तक 'तुकडाबंदी कानून' में ढील दी है दी है, ताकि नियोजित आवासीय क्षेत्रों में छोटे भूखंडों का क्रय-विक्रय सुलभ हो सके। पीएमआरडीए, एमएमआरडीए, पुणे महानगर पालिका और क्षेत्रीय विकास योजनाओं के अंतर्गत आने वाले अधिकृत रिहायशी क्षेत्रों में एक-दो गुंठे के व्यवहार को राहत प्रदान की गई है।
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि 200 मीटर की इस सीमा के बाहर कृषि भूमि के टुकडे कर बिक्री की अनुमति कदापि नहीं दी जाएगी। उन्होंने तर्क दिया कि यदि कृषि भूमि को अनियंत्रित रूप से छोटे प्लॉट बनाकर बेचने की छूट दी गई, तो संपूर्ण राज्य में अवैध विकास का जाल बिछ जाएगा।
राजस्व मंत्री ने बताया कि सरकार के संज्ञान में ऐसे कई मामले आए हैं, जहां कुछ व्यक्तियों ने भूसंपादन की गोपनीय सूचनाएं समय से पूर्व प्राप्त कर संबंधित जमीनों का सौदा किया और अनुचित लाभ कमाया। इन मामलों की गहन जांच की जा रही है। इस प्रक्रिया में गूगल मैप्स, पिछले एक वर्ष के पंजीकरण रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की सहायता ली जा रही है। उन्होंने कड़ा संदेश दिया कि यदि कोई व्यक्ति इस प्रकार की अनियमितता में दोषी पाया गया, तो उसे सरकार की ओर से कोई मुआवजा नहीं दिया जाएगा।
सरकार जुलाई से महाराष्ट्र में 'लैंड टाइटलिंग एक्ट' लागू करने की दिशा में कार्य कर रही है। बावनकुले ने स्पष्ट किया कि वर्तमान व्यवस्था में '7/12 उतारा' या 'प्रॉपर्टी कार्ड' अंतिम मालिकाना हक का पूर्ण प्रमाण नहीं है, बल्कि यह केवल एक राजस्व रिकॉर्ड है। नए कानून के लागू होने के बाद भूमि का स्पष्ट और वैधानिक मालिकाना हक (लीगल टाइटल) सुनिश्चित होगा, जिससे ऑनलाइन लेनदेन को बढ़ावा मिलेगा और बिचौलियों का हस्तक्षेप समाप्त हो जाएगा।