
गुरुवार को पुणे में बंद रहा, सड़काें पर पसरा सन्नाटा (सोर्स: सोशल मीडिया)
Ajit Pawar Plane Crash: महाराष्ट्र की राजनीति के ‘दादा’ और पुणे जिले के विकास के पर्याय माने जाने वाले उपमुख्यमंत्री अजित पवार के आकस्मिक निधन से पूरा राज्य स्तब्ध है। अपने प्रिय नेता के प्रति सम्मान और दुख व्यक्त करने के लिए पुणे शहर, पिंपरी-चिंचवड़ और बारामती सहित पूरे जिले में व्यापारियों और आम नागरिकों ने स्वस्फूर्त ‘बंद’ रखा। यह केवल एक राजनीतिक क्षति नहीं, बल्कि पुणे के एक ‘अभिभावक’ के खो जाने का गम था, जो सड़कों पर पसरी खामोशी में साफ दिखाई दिया।
अजित पवार अपनी स्पष्टवादिता और प्रशासनिक पकड़ के लिए जाने जाते थे। उनके निधन की खबर मिलते ही पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ के व्यापारिक संगठनों ने शोक स्वरूप अपने शटर गिरा दिए। व्यापारियों के अनुसार, दादा एक ऐसे नेता थे, जिन्होंने उद्योग और व्यापार की समस्याओं को हमेशा टेबल पर सुलझाया, पिंपरी-चिंचवड़ के भोसरी, दिघी, चरहोली, मोशी, वाकड, निगड़ी और सांगवी जैसे प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों में सन्नाटा पसरा रहा। हिजवडी आईटी पार्क की कई प्रमुख कंपनियों ने भी कामकाज बंद रखकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
अजित पवार का गढ़ कहे जाने वाले बारामती में माहौल सबसे अधिक गमगीन था, स्थानीय लोगों के अनुसार, कोरोना महामारी के बाद पहली बार बारामती की सडकों पर ऐसी नीरवता देखी गई। मेडिकल स्टोर्स और अस्पतालों जैसी अत्यावश्यक सेवाओं को छोड़कर एक भी दुकान नहीं खुली, बारामती के ग्रामीण इलाकों से लेकर मुख्य बाजार तक, हर चेहरा मायूस था। सड़कों पर केवल उन कार्यकर्ताओं के वाहनों की आवाजाही दिख रही थी, जो अपने ‘दादा’ की एक आखिरी झलक पाने के लिए बेचैन थें।
अजित पवार का पार्थिव शरीर जब उनके पैतृक गांव काटेवाडी पहुंचा, तो वहां भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह तड़के से ही महाराष्ट्र के कोने-कोने से लोग जुटना शुरू हो गए थे। प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिसकर्मियों के लिए यह केवल ड्यूटी नहीं, बल्कि एक व्यक्तिगत क्षति थी।
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पिछले कई वर्षों से अजित पवार की सुरक्षा में तैनात एक अंगरक्षक को बिलख-बिलख कर रोते देख वहां मौजूद हर आंख नम हो गई, अधिकारियों ने याद किया कि कैसे दादा सुबह 6 बजे से काम शुरू कर देते थे और फाइलों का निपटारा बिजली की गति से करते थे। राज्य सरकार द्वारा घोषित तीन दिवसीय राजकीय शोक के बीच, पुणे के पालकमंत्री के रूप में उनके योगदान को हर कोई याद कर रहा है। मेट्रो परियोजना से लेकर सड़कों के जाल तक, पुणे के आधुनिक स्वरूप में उनकी छाप अमिट है। नागरिकों का कहना है कि ‘दादा के बिना विकास की वह गति अब शायद ही देखने को मिले।






