हमें यह खुशी का दिन नहीं लग रहा… बारामती में नहीं मनेगा जीत का जश्न, क्यों भावुक हुए जय पवार?
No Victory Celebration In Baramati: बारामती उपचुनाव में शानदार जीत के बावजूद, जय पवार ने अजित पवार के निधन और नसरापुर हमले की घटना के चलते किसी भी तरह के जश्न का आयोजन न करने की घोषणा की है।
- Written By: गोरक्ष पोफली
जय पवार (सोर्स: डिजाइन फोटो)
Jay Pawar Emotional Statement: बारामती विधानसभा उपचुनाव के नतीजे सामने आ चुके हैं और यहाँ एक बार फिर पवार परिवार का दबदबा कायम रहा है। बंपर जीत के बावजूद, बारामती की सड़कों पर इस बार न तो ढोल-नगाड़े बज रहे हैं और न ही गुलाल उड़ाया जा रहा है। आमतौर पर जीत के बाद होने वाले भारी उत्साह के उलट, इस बार माहौल बेहद शांत और भावुक है। जय पवार ने स्पष्ट कर दिया है कि बारामती में इस जीत का कोई जश्न नहीं मनाया जाएगा।
पिता के निधन का गहरा दुख
मीडिया से बातचीत के दौरान जय पवार काफी भावुक नजर आए। उन्होंने जीत की खुशी न मनाने के पीछे सबसे बड़ा कारण अपने पिता और दिग्गज नेता दिवंगत अजीत दादा के निधन को बताया। बता दें कि यह उपचुनाव अजीत पवार के असामयिक निधन के कारण ही हुआ था। जय पवार ने कहा, यह जीत हमारे लिए केवल एक राजनीतिक आंकड़ा नहीं है, बल्कि दादा की विरासत है। चूंकि यह चुनाव उनके जाने के बाद हुए दुखद परिस्थितियों में हुआ है, इसलिए हमें यह किसी भी प्रकार से खुशी का दिन नहीं लगता।
नरसापुर की घटना से आहत है मन
केवल पारिवारिक दुख ही नहीं, बल्कि सामाजिक संवेदनाओं ने भी जय पवार को जश्न से दूर रहने पर मजबूर किया है। उन्होंने पुणे के नसरापुर में एक मासूम बच्ची के साथ हुए जघन्य अत्याचार और हत्या की घटना का जिक्र किया। जय पवार ने कड़े शब्दों में कहा कि जब राज्य में ऐसी हृदयविदारक घटनाएं हो रही हों, तो हम जश्न मनाने के बारे में सोच भी नहीं सकते। उन्होंने प्रशासन से आरोपी को सख्त से सख्त सजा दिलाने की मांग की और पीड़ित परिवार को हर संभव मदद का भरोसा दिया।
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2029 का चुनाव और सुनेत्रा पवार की भूमिका
जब मीडिया ने उनसे भविष्य की रणनीति और 2029 के विधानसभा चुनाव में बारामती से उनकी उम्मीदवारी को लेकर सवाल किया, तो जय पवार ने बड़ी परिपक्वता से जवाब दिया। उन्होंने कहा, अभी राजनीति या अगले चुनाव की बातें करने का यह सही समय नहीं है। हमारा पूरा ध्यान अभी जनसेवा पर है।
उन्होंने अपनी मां और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के बारे में बात करते हुए कहा कि वे मुंबई में रहकर अपना काम पूरी निष्ठा से कर रही हैं। जय पवार ने साफ किया कि वे अपनी मां के मार्गदर्शन में निरंतर सक्रिय रहेंगे और बारामती के विकास के लिए अपना काम जारी रखेंगे।
