पुणे अग्निकांड (सोर्स: सोशल मीडिया) 
पुणे

पुणे: दिल्ली अग्निकांड के बाद भी नहीं जागे लोग, हजारों इमारतों में से केवल 489 ने जमा किया फॉर्म-बी

Pune Fire Safety: दिल्ली हादसे के बाद पुणे में अग्नि सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं। हजारों सोसायटियों और होटलों में से सिर्फ 489 संस्थानों ने ही अपना 'फॉर्म-बी' ऑडिट जमा किया है।

रूपम सिंह

Pune Fire Safety Systems:  दिल्ली के एक होटल में हाल ही में लगी भीषण आग में 21 लोगों की मौत के बाद देशभर में अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर चिंता बढ़ गई है। पुणे शहर की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है। शहर के होटल, अस्पताल, हाउसिंग सोसायटी, कॉलेज, मॉल और व्यावसायिक परिसरों के लिए हर छह महीने में अग्नि सुरक्षा प्रणाली के सुचारु रूप से कार्यरत होने का प्रमाण देने वाला 'फॉर्म-बी' जमा करना अनिवार्य है। इसके बावजूद पुणे महानगर पालिका के अग्निशमन विभाग को अब तक केवल 489 संस्थानों ने ही यह रिपोर्ट सौंपी है, जबकि ऐसे प्रतिष्ठानों की संख्या हजारों में है।

लाखों जिंदगियां दांव पर

पुणे शहर में करीब 25 हजार हाउसिंग सोसायटियां, 800 से अधिक अस्पताल, 150 चेन होटल, 300 से ज्यादा होटल एवं गेस्ट हाउस तथा 100 से अधिक व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स हैं। इन सभी स्थानों पर अग्नि सुरक्षा व्यवस्था और नियमित फायर ऑडिट जरूरी है। बावजूद इसके अधिकांश संस्थानों ने फॉर्म-बी जमा नहीं किया है। इससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि हजारों इमारतों में स्थापित फायर सेफ्टी सिस्टम वास्तव में चालू हालत में हैं या नहीं।

सुरक्षा व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी प्रमाली का अभाव

भवन निर्माण के दौरान फायर सेफ्टी सिस्टम लगाए जाते हैं, लेकिन बाद में उनके रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित प्रबंधन पर होती है। बड़े अस्पतालों, मॉल और शैक्षणिक संस्थानों को हर वर्ष एनओसी भी लेना पड़ता है, लेकिन उसके बाद सुरक्षा व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी के लिए कोई प्रभावी तंत्र नहीं दिखता। ऐसे में फायर पंप, संप्रिंकलर, हाइड्रेट और अलार्म सिस्टम केवल कागजों तक सीमित रहने की आशंका बढ़ गई है।

पुणे में लगातार ऊंची इमारतों और बड़े आवासीय-व्यावसायिक प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिल रही है, लेकिन उनमें स्थापित अग्नि सुरक्षा प्रणालियों की नियमित जांच नहीं हो रही। वहीं होटल और बेकरी जैसे व्यवसाय अब खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अधीन होने से कई प्रतिष्ठान अग्निशमन विभाग की सीधी निगरानी से बाहर हो गए हैं।

अक्सर किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन सक्रिय दिखाई देता है। नोटिस और निर्देश जारी होते है, लेकिन समय बीतने के साथ स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है। ऐसे में नागरिकों के बीच यह चिंता बढ़ रही है कि कहीं किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही प्रशासन की नींद न खुले।

हजारों इमारतों की सुरक्षा पर सवाल

  • हाउसिंग सोसायटियां। 25000
  • छोटे-बड़े अस्पताल 800
  • होटल एवं गेस्ट हाउस 300
  • चेन होटल संचालित 150
  • व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स 100
  • संस्थानों ने फॉर्म-बी भरा 489
  • गगनचुंबी प्रोजेक्ट्स 35

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