अग्निशमन विभाग की बंद आंखें, बिना निरीक्षण पास हो रहीं फाइलें; नागपुर में अवैध निर्माण बना जानलेवा

Nagpur Fire Safety: नागपुर में फायर एनओसी मिलने के बावजूद कई बहुमंजिला इमारतों में अग्नि सुरक्षा इंतजाम नदारद हैं। तंग इलाकों में बढ़ते निर्माण को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
Fire Department Turns a Blind Eye: Files Being Cleared Without Inspection; Illegal Construction in Nagpur Becomes a Deadly Threat
अग्नि सुरक्षा, फायर एनओसी, बहुमंजिला इमारत, नागपुर, अवैध निर्माण,(सोर्स: सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Nagpur High Rise Buildings: नागपुर ऑरेंज सिटी में इस समय एक बेहद खतरनाक और जानलेवा खेल चल रहा है। शहर के रिहायशी और तंग व्यावसायिक इलाकों में धड़ल्ले से बहुमंजिला इमारतें खड़ी हो रही हैं जिन्हें अग्निशमन विभाग की ओर से धड़ाधड़ फायर एनओसी बांटी जा रही है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इन इमारतों में आग से निपटने के लिए रत्ती भर भी इंतजाम नहीं हैं।

फायर विभाग के 'दलाल' सक्रिय हैं जो मोटी रकम के बदले बिना किसी जमीनी निरीक्षण के टेबल पर ही एनओसी की फाइलें पास करवा रहे हैं। इस लापरवाही के कारण पूरा शहर इस समय 'बारूद के ढेर' पर बैठा हुआ है। बार-बार हो रही घटनाएं भी इस ओर इशारा कर रही हैं कि अग्निशमन विभाग के अधिकारी केबिन में बैठकर काम कर रहे हैं और मनपा जोन कार्यालयों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।

तंग गलियां और बड़ी इमारतें

शहर के सबसे व्यस्त और घने व्यापारिक केंद्र जैसे इतवारी, महल, सीताबर्डी और सदर में यह समस्या सबसे विकराल रूप ले चुकी है। इन इलाकों की गलियां इतनी संकरी हैं कि सामान्य दिनों में भी वहां से पैदल निकलना दूभर होता है। इन छोटी छोटी जगहों पर नियमों को ताक पर रखकर विशालकाय व्यावसायिक परिसर और ऊंची इमारतें खड़ी कर दी गई हैं। सबसे डरावना पहलू यह है कि यदि इन इमारतों में कभी भीषण आगजनी होती है तो अग्निशमन दल के बड़े टेंडर मौके पर पहुंच ही नहीं पाएंगे। एक आम नागरिक भी इन इमारतों को देखकर आसानी से समझ सकता है कि यह निर्माण पूरी तरह अवैध और असुरक्षित है लेकिन विभाग की आंखें बंद हैं।

बड़ी साठगांठ का संदेह

फायर एनओसी लेना आम आदमियों के लिए सुलभ नहीं है लेकिन जिस प्रकार से खैरात बांटी जा रही है उससे संदेश होने लगा है। इतना ही नहीं नोटिस जारी करते वक्त 'किंतु परंतु' जैसे शब्दों का खेल खेला जाता है, ताकि उन पर किसी प्रकार की आंच न आए। 'किंतु परंतु' शब्द के चक्रव्यूह में शहर का सत्यानाश कर दिया गया है। मनपा के आला अधिकारियों को भी यह दिखाई नहीं दे रहा है। आज समय की जरूरत है कि एनओसी जारी करते वक्त मनपा के जोनल कार्यालय से सलाह ली जाए। इससे वस्तुस्थिति का पता चल पाएगा और लोगों के जान से खिलवाड़ कम होगा।

मनपा जोन कार्यालयों को अंधेरे में रखकर मनमानी

अग्निशमन विभाग की इस मनमानी और तानाशाही का खामियाजा नागपुर महानगरपालिका (मनपा के जोन कार्यालयों) को भुगतना पड़ रहा है। नियमानुसार किसी भी इमारत को एनओसी देने से पहले स्थानीय जोन कार्यालय की सलाह और भौगोलिक स्थिति की जानकारी ली जानी चाहिए। हकीकत यह है कि फायर विभाग द्वारा एनओसी बांटते समय स्थानीय जोन कार्यालयों को पूरी तरह अंधेरे में रखता है। उन्हें न तो कोई

जानकारी दी जाती है और न ही कोई सलाह ली जाती है लेकिन जब ये अवैध इमारतें बनकर खड़ी हो जाती है। उन पर कार्रवाई का दबाव बनता है तो जोन कार्यालय के अधिकारियों को आगे कर दिया जाता है जिससे प्रशासनिक स्तर पर भारी परेशानी और असमंजस की स्थिति पैदा हो रही है।

10 वर्षों का एनओसी डेटा सार्वजनिक करे प्रशासन

शहर के नागरिकों की जान के साथ खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, कागजों पर सब कुछ ऑलराइट दिखाकर जो एनओसी बांटी गई है, उनकी जमीनी हकीकत कुछ और ही है। मैं मांग करता हूं कि पिछले 10 वर्षों में विभाग द्वारा जारी की गई सभी फायर एनओसी का डेटा तुरंत सार्वजनिक किया जाए, इसकी एक उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए कि तंग गलियों में बनी इमारतों को आखिर किस आधार पर एनओसी दी गई। साथ ही एनओसी जारी करने से पहले मनपा के जोन अधिकारियों से सलाह लेना अनिवार्य किया जाना चाहिए। इससे मनमानी रोकने में मदद मिलेगी।

- अभिजीत झा (नगरसेवक)

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com