एल्गार परिषद मामले के आरोपी को मिली जमानत, कोर्ट ने सागर गोरखे को दी लॉ एग्जाम देने की मंजूरी
NIA की विशेष अदालत ने एल्गार-परिषद मामले के आरोपी सागर गोरखे को लॉ की परीक्षा देने के लिए 20 नवंबर से 16 दिसंबर तक अंतरिम जमानत दी। अदालत ने कहा कि पहले भी गोरखे ने सभी शर्तें पूरी की थीं।
- Written By: आकाश मसने
एल्गार परिषद मामले का आरोपी सागर गोरखे (सोर्स: सोशल मीडिया)
Elgar Parishad Case Accused Sagar Gorkhe Bail: एल्गार-परिषद माओवादी संबंध मामले के आरोपी सागर गोरखे को उसकी विधि (लॉ) की डिग्री की परीक्षा में शामिल होने के लिए एनआईए की विशेष अदालत ने अंतरिम जमानत दे दी है। कबीर कला मंच के सदस्य गोरखे को, जिसे प्रतिबंधित संगठन भाकपा (माओवादी) का कथित मोर्चा संगठन माना जाता है, सितंबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था।
विशेष न्यायाधीश चकोर भाविस्कर ने बुधवार को सागर गोरखे को 20 नवंबर से 16 दिसंबर तक के लिए अस्थायी जमानत दी है, ताकि वह अपनी कानून की परीक्षाओं में शामिल हो सके। गोरखे वर्तमान में पड़ोसी नवी मुंबई की तलोजा जेल में बंद हैं।
गोरखे कबीर कला मंच के सदस्य हैं, और पुलिस के अनुसार यह मंच प्रतिबंधित संगठन भाकपा (माओवादी) का कथित मोर्चा संगठन माना जाता है। गोरखे को सितंबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था।
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एनआई ने किया था विराेध
एनआईए की तरफ से विशेष लोक अभियोजक प्रकाश शेट्टी ने गोरखे की अर्जी का कई कारणों से विरोध किया था। विरोध के मुख्य बिंदुओं में यह शामिल था कि आरोपी के खिलाफ गंभीर अपराध हैं, और अंतरिम जमानत की अवधि बहुत लंबी है। इसके अलावा, अभियोजक ने यह आशंका भी जताई कि आरोपी के फरार होने का खतरा हो सकता है।
अदालत ने क्यों दी जमानत?
अभियोजन पक्ष के विरोध के बावजूद, अदालत ने अपने आदेश में महत्वपूर्ण बिंदुओं को रेखांकित किया। अदालत ने उल्लेख किया कि उसने पहले भी गोरखे को शैक्षणिक कार्यों के लिए अनुमति दी थी।
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न्यायालय ने बताया कि उसने छह मार्च, 2024 को गोरखे को सीईटी-लॉ प्रवेश परीक्षा में बैठने की इजाज़त दी थी। इसके अलावा, उन्हें 14 दिसंबर, 2024 से चार जनवरी, 2025 तक अगली परीक्षा में शामिल होने के लिए भी अस्थायी जमानत दी गई थी। अदालत ने कहा कि आरोपी ने पिछले मामलों में उस पर लगाई गई किसी भी शर्त का उल्लंघन नहीं किया था। साथ ही, उसने निर्देशानुसार आत्मसमर्पण भी कर दिया था।
क्या है एल्गार परिषद मामला?
सागर गोरखे और 14 अन्य कार्यकर्ता तथा शिक्षाविदों पर 31 दिसंबर 2017 को पुणे में आयोजित एल्गार परिषद सम्मेलन में कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने के सिलसिले में मामला दर्ज किया गया था। पुलिस का दावा है कि इन कथित भड़काऊ भाषणों के कारण ही अगले दिन पुणे शहर के बाहरी इलाके कोरेगांव-भीमा में हिंसा भड़क गई थी।
