कुकड़ी क्षेत्र में गहराता जल संकट: डिंभे जलाशय का जलस्तर गिरने से उभरने लगा प्राचीन इतिहास
Pune Water Crisis: डिंभे जलाशय में केवल 10.25% पानी शेष। जलस्तर घटने से दशकों पुराने ऐतिहासिक मंदिर और अवशेष आए सामने। जानें खेती और पेयजल पर बढ़ते संकट का पूरा विवरण।
- Written By: गोरक्ष पोफली
डिंभे डैम (सोर्स: सोशल मीडिया)
Dimbhe Dam Water Level Drop: पुणे जिले की जीवनवाहिनी मानी जाने वाली कुकड़ी परियोजना के तहत आने वाले सबसे बड़े बांध, डिंभे जलाशय की स्थिति चिंताजनक हो गई है। भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान के कारण जलाशय का जलस्तर तेजी से गिर रहा है, जिससे वर्तमान में केवल 10.25 प्रतिशत उपयोगी जल भंडार ही शेष बचा है। पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान जलस्तर 11.27 प्रतिशत था, जिससे स्पष्ट है कि इस साल संकट अधिक गंभीर है।
व्यापक क्षेत्रीय प्रभाव और सिंचाई की चिंता
डिंभे जलाशय पर न केवल आंबेगांव, जुन्नर और शिरूर बल्कि अहिल्यानगर जिले के पारनेर, श्रीगोंदा और कर्जत तहसीलों का एक बड़ा हिस्सा भी निर्भर है। जलस्तर में आई इस भारी गिरावट के कारण आने वाले दिनों में पीने के पानी के साथ-साथ खेती के लिए सिंचाई व्यवस्था चरमराने का डर सताने लगा है। खरीफ सीजन की शुरुआत नजदीक है, लेकिन पानी की कमी के कारण किसान मानसून की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। प्रशासन ने नागरिकों और किसानों से अपील की है कि वे उपलब्ध जल का उपयोग अत्यंत मितव्ययिता और सावधानी से करें।
ऐतिहासिक अवशेषों का पुनः दर्शन
जलाशय का पानी घटने से एक ओर जहाँ चिंता का माहौल है, वहीं दूसरी ओर एक ऐतिहासिक दृश्य भी उभर कर सामने आया है। दशकों पहले बांध के निर्माण के दौरान जलाशय में समा चुके प्राचीन जैन मंदिर, पुरानी हवेलियों के अवशेष और बस्तियों की निशानियां अब फिर से साफ दिखाई देने लगी हैं। इन ऐतिहासिक और भावुक कर देने वाले अवशेषों को देखने के लिए विस्थापित परिवार और उनकी नई पीढ़ी बड़ी संख्या में यहाँ पहुँच रही है, ताकि वे अपने पूर्वजों की यादों और बचपन के पलों को ताजा कर सकें।
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प्रशासनिक और स्थानीय प्रतिक्रिया
अवांसरी खुर्द के सरपंच प्रसाद कराले के अनुसार, जल भंडार के तेजी से घटने के कारण किसानों के सामने फसल नियोजन की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। वहीं, कुकड़ी परियोजना के वरिष्ठ अधिकारी दत्ता कोकणे ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में उपलब्ध जल का प्रबंधन पूरी योजना के साथ किया जा रहा है ताकि मानसून आने तक पानी की आपूर्ति बनी रहे। उन्होंने सभी से अपील की है कि मानसून के शुरू होने तक इस सीमित जल भंडार का संरक्षण करना अत्यंत आवश्यक है।
