सावधान! आपकी जिंदगी भर की कमाई पर साइबर ठगों की नजर, पुणे में 3 लोगों से 89 लाख की ऑनलाइन धोखाधड़ी

Cyber fraud in Pune: पुणे में साइबर ठगी के तीन अलग-अलग मामलों में तीन नागरिकों से कुल 89 लाख रुपये ठगने की शिकायत सामने आई है। पीड़ितों में दो वरिष्ठ नागरिक शामिल हैं और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
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पुणे में साइबर ठगी का जाल(सोर्स: गुगल जेमिनी)
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General India Life Insurance Fake Agent: शहर में ऑनलाइन ठगी के मामले सामने आ रहे हैं। साइबर ठगी की तीन अलग-अलग घटनाओं में तीन नागरिकों से कुल 89 लाख रुपये की धोखाधड़ी किए जाने की शिकायत दर्ज हुई है। पीड़ितों में दो वरिष्ठ नागरिक शामिल हैं।

इन मामलों में फुरसुंगी, पार्वती और फरासखाना पुलिस थानों में शिकायतों के आधार पर मामले दर्ज किए गए हैं और जांच शुरू कर दी गई है।

फर्जी इंश्योरेंस एजेंट बनकर 40 लाख ठगे

फुरसुंगी में एक व्यक्ति को कथित तौर पर जनरल इंडिया लाइफ इंश्योरेंस कंपनी का एजेंट बनकर ठगी का शिकार बनाया गया। शिकायत के अनुसार, साइबर ठग ने 46 वर्षीय व्यक्ति से संपर्क किया और खुद को इंश्योरेंस कंपनी का प्रतिनिधि बताया।

आरोपी ने पॉलिसी का प्रीमियम जमा करने का झांसा देकर अलग-अलग बैंक खातों में कुल 40 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए। बाद में पीड़ित को ठगी का पता चला।

72 वर्षीय बुजुर्ग से 27 लाख की धोखाधड़ी

दूसरी घटना सहकार नगर इलाके की बताई गई है। शिकायत के अनुसार, साइबर ठगों ने अलग-अलग बहाने बनाकर 72 वर्षीय बुजुर्ग को निशाना बनाया।

13 से 25 अगस्त 2026 के बीच ऑनलाइन माध्यम से उनसे कथित तौर पर 27 लाख रुपये ट्रांसफर करवाए गए। इस मामले में भी पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू की है।

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मुफ्त पेंशन कार्ड का झांसा देकर 22 लाख

तीसरी घटना कसबा पेठ के पवले चौक इलाके की है। 18 अगस्त को एक बुजुर्ग को कथित तौर पर मुफ्त पेंशन कार्ड दिलाने का लालच दिया गया। शिकायत के मुताबिक, इसी बहाने उनसे 22 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी की गई। मामले की जांच पुलिस निरीक्षक राजेश महाला कर रहे हैं।

पुलिस जांच में जुटी

तीनों मामलों में पुलिस अब ऑनलाइन लेनदेन, बैंक खातों और ठगी में इस्तेमाल किए गए माध्यमों की जानकारी जुटा रही है। तीनों घटनाओं में कुल 89 लाख रुपये की राशि का उल्लेख शिकायतों में किया गया है।

इन मामलों से एक बार फिर सामने आया है कि साइबर ठगी में अलग-अलग बहानों और पहचान का इस्तेमाल कर नागरिकों से बड़ी रकम ऑनलाइन ट्रांसफर कराई जा रही है। हालांकि, इन मामलों में आरोपियों की पहचान और उनकी भूमिका की अंतिम पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही होगी।