3 हजार की घूस पड़ी भारी! नागपुर नगर निगम के अधिकारी को रिश्वत मामले में 4 साल की कैद

Nagpur Crime News: नागपुर में कर्मचारी का वेतन निकालने के लिए रिश्वत मांगने वाले मनपा सफाई निरीक्षक खिलावन लांजेवार को अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत 4 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।
Nagpur MNC Bribery Case
नागपुर मनपा रिश्वत मामला(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Nagpur Bribery Case: कर्मचारी का वेतन निकालने के लिए रिश्वत मांगने के मामले में नागपुर महानगरपालिका के सफाई निरीक्षक खिलावन गणुराम लांजेवार को अदालत ने दोषी ठहराते हुए 4 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश एसएच ग्वालानी ने आरोपी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी माना।

मामला हुडकेश्वर थाना क्षेत्र का है और यह घटना वर्ष 2015 की है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, मनपा के प्रभाग क्रमांक 32 में कार्यरत एक महिला सफाई कर्मचारी कुछ समय से काम पर अनुपस्थित थी। उसका वेतन निकालने के लिए तत्कालीन सफाई निरीक्षक लांजेवार ने कथित तौर पर उससे 4,000 रुपये रिश्वत की मांग की थी।

रिश्वत देने से इनकार, एसीबी में पहुंची शिकायत

महिला कर्मचारी रिश्वत देने के पक्ष में नहीं थी। उसने मामले की शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) से की। शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने आरोपी को पकड़ने के लिए जाल बिछाया।

कार्रवाई के दौरान लांजेवार को 3,000 रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ा गया। इसके बाद एसीबी ने मामले की जांच शुरू की और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया।

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5 गवाहों की गवाही को अदालत ने माना विश्वसनीय

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 5 गवाहों की गवाही कराई गई। इनमें शिकायतकर्ता, पंच गवाह, जांच अधिकारी और सक्षम अधिकारी की गवाही शामिल थी।

अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहियों को विश्वसनीय माना। इसके आधार पर आरोपी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत दोषी करार दिया गया।

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अदालत ने धारा 7 के तहत आरोपी को 3 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। वहीं, धारा 13(1)(ड) के तहत 4 वर्ष के सश्रम कारावास के साथ जुर्माने की सजा सुनाई गई।

मामले में सरकार की ओर से सहायक सरकारी वकील अभय जिकार ने पैरवी की। अदालत के इस फैसले के बाद रिश्वतखोरी के मामलों में भ्रष्टाचार निरोधक कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया की भूमिका एक बार फिर सामने आई है।

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