PCMC में रिश्वतखोरी का खुलासा, अधिकारी-कर्मचारी ठेकेदारों के साथ सांठगांठ में लिप्त!

Pimpri Chichwad Municipal Corporation के लेखा विभाग से भ्रष्टाचार की खबर सामने आ रही है। जिसको लेकर सामाजिक कार्यकर्ता राहुल कोल्हटकर ने CM Devendra Fadnavis को ज्ञापन सौंपा हैं।
PCMC Corporators Relatives Interference
पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Pune News: पिंपरी चिंचवड़ महानगर पालिका (पीसीएमसी) के लेखा विभाग में फैले कथित भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। सामाजिक कार्यकर्ता राहुल कोल्हटकर ने इस मामले में सीधे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को ज्ञापन सौंपकर तत्काल और कठोर कार्रवाई की मांग की है।

कोल्हटकर ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि लेखा विभाग में वर्षों से एक ही पद पर जमे अधिकारी और कर्मचारी ठेकेदारों के साथ आर्थिक सांठगांठ करके खुलेआम रिश्वतखोरी कर रहे हैं, जिसके कारण बिना पैसे दिए कोई भी फाइल आगे नहीं बढ़ती।

PCMC में भ्रष्टाचार का बोलबाला शिकायतकर्ता ने बताया कि 8 अगस्त की मुख्यमंत्री कार्यालय को ईमेल के माध्यम से शिकायत भेजी गई थी, जिसके बाद 11 अगस्त को जांच के आदेश दिए गए, लेकिन पीसीएमसी प्रशासन अब तक चुप्पी साधे है। इस बीच, 31 जुलाई को एक कर्मचारी का रिश्वत लेते हुए वीडियो वायरल होने से मनपा के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े ही गए है। कोल्हटकर ने भ्रष्टाचार रोकने और पारदर्शिता लाने के लिए नियमों का उल्लंघन कर वर्षों से, एक ही सीट पर टिके अधिकारियों और कर्मचारियों की तत्काल बदली करने और वायरल वीडियो के दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

मुख्यमंत्री से अपील

राहुल कोल्हटकर ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से सीधे हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता बनाए रखने और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए संबंधित अधिकारियों, लिपिकों और चपरासियों को तत्काल बदली की जाए, साथ ही स्थितखोरी के वीडियो में दिखाई दे रहे कर्मचारी और विभाग प्रमुखों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

बिना रिश्वत आगे नहीं बढ़ती फाइल

कोल्हटकर का कहना है कि लेखा विभाग में ठेकेदारों के बिल भुगतान संबंधित काम होता है और यहां बिना पैसों के कोई फाइल आगे नहीं बढ़ती, उन्होंने आरोप लगाया कि कई अधिकारी, लिपिक और कर्मचारी पांच साल से अधिक समय से उसी पद पर टिके हुए है। नियमों के अनुसार, किसी भी कर्मचारी की एक ही जगह पर तीन साल से ज्यादा सेवा नहीं होनी चाहिए, लेकिन मनपा में इस प्रावधान का पालन नहीं किया जा रहा है। कुछ कर्मचारियों को पदोन्नति के बाद भी उसी विभाग में रखा गया है और कई का तबादला रद्द करके उन्हे दोबारा वहीं जिम्मेदारी सौंप दी गई है।

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