मिडिल ईस्ट में बढ़ता युद्ध का खतरा… अमेरिका ने भेजे 2500 मरीन और जंगी जहाज, ईरान के साथ तनाव चरम पर

Middle East Deployment: अमेरिका ने बढ़ते तनाव के बीच 2500 मरीन सैनिक और जंगी जहाज तैनात किए हैं। ईरान द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने के बाद युद्ध की आशंका और तेल संकट का खतरा और भी गहरा गया है।
US Sends 2500 Marines and Warships to Middle East Amid Rising Iran-Israel Conflict Tensions Update
विशाल अमेरिकी जंगी जहाज 'यूएसएस ट्रिपोली' (सोर्स-सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

US Military Deployment Iran: मिडिल ईस्ट में युद्ध की लपटें अब और भी भीषण होने के संकेत मिल रहे हैं क्योंकि अमेरिका ने अपने हजारों जांबाज सैनिक वहां भेज दिए हैं। ईरान और इजराइल के बीच बढ़ती सैन्य तनातनी ने पूरी दुनिया की नींद उड़ा दी है और अब शांति की हर कोशिश नाकाम नजर आ रही है। अमेरिकी सेना की इस ताजा तैनाती का मुख्य उद्देश्य अपने कूटनीतिक हितों की रक्षा करना और क्षेत्र में अस्थिरता को बढ़ने से रोकना है। इस भारी तनाव का सीधा असर अब पूरी दुनिया के तेल बाज़ारों और आम आदमी के खर्चों पर भी साफ तौर पर दिखाई देने लगा है।

अमेरिकी सेना की बड़ी तैनाती

अमेरिकी सुरक्षा अधिकारियों ने इस बात की पुष्टी की है कि लगभग 2,500 नौसैनिकों के एक बड़े दल को मिडिल ईस्ट के अशांत क्षेत्र में भेजा जा रहा है। इस महत्वपूर्ण मिशन में 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट के जवान और 'यूएसएस ट्रिपोली' जैसा विशाल जंगी जहाज शामिल है जो हर तरह के हमले में सक्षम है। ये जांबाज सैनिक अभी जापान के पास तैनात थे और जानकारों का मानना है कि इन्हें ईरान के पास समुद्री सीमा तक पहुंचने में एक सप्ताह लगेगा।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य और तेल संकट

ईरान ने हाल ही में इजराइल और कई खाड़ी देशों पर मिसाइलों और ड्रोनों से हमला किया है जिससे पूरे पश्चिम एशिया में दहशत का माहौल है। इसके साथ ही ईरान ने व्यापार के लिए सबसे जरूरी हॉर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है जो पूरी दुनिया के लिए बड़ी चुनौती है। इस रास्ते के बंद होने से वैश्विक तेल का पांचवां हिस्सा रुक गया है और कच्चे तेल की कीमतें 40% उछलकर 100 डॉलर प्रति बैरल हो गई हैं।

मानवीय त्रासदी और बढ़ता विनाश

इजराइल और हिज्बुल्लाह के बीच जारी इस खूनी जंग में अब तक लेबनान में लगभग 800 मासूम लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। इस भीषण हिंसा की वजह से करीब 8.5 लाख लोग बेघर हो गए हैं और दर-दर भटकने को मजबूर हैं जिससे मानवीय संकट गहरा गया है। अमेरिकी और इजराइली विमानों ने ईरान के अंदर घुसकर सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है जिससे अब बड़े पैमाने पर युद्ध छिड़ने का डर बना हुआ है।

मरीन सैनिकों की विशेष भूमिका

अमेरिकी रक्षा विभाग का कहना है कि इन मरीन सैनिकों को भेजना किसी नए जमीनी युद्ध की शुरुआत नहीं है बल्कि यह सुरक्षा का एक बड़ा घेरा है। इन सैनिकों को दूतावासों की सुरक्षा करने और युद्ध क्षेत्र में फंसे आम नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के काम में महारत हासिल है। इसके अलावा ये सैनिक किसी भी बड़ी मानवीय आपदा में मदद करने के लिए तैयार रहते हैं ताकि बेगुनाह लोगों को कम से कम नुकसान उठाना पड़े।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com