प्री-मानसून ने छीना किसानों का निवाला, बारामती में ओलों की बारिश से फसलें तबाह, मुआवजे की पुकार
Baramati Crop Loss 2026: बारामती में प्री-मानसून तूफान और ओलावृष्टि से केला, अनार और अमरूद की फसलें बर्बाद। प्रशासन ने शुरू किया पंचनामा, किसानों ने की मुआवजे की मांग। जानें पूरी रिपोर्ट।
- Written By: गोरक्ष पोफली
ओलावृष्टी से हुआ नुकसान (सोर्स: सोशल मीडिया)
Baramati Pre Monsoon Crop Damage: पुणे जिले की बारामती तहसील के पश्चिमी हिस्से में रविवार को आए प्री-मानसून तूफान, भारी बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी है। इस प्राकृतिक आपदा के कारण तहसील के वडगांव निंबालकर, कोराले बुद्रुक, थोपटेवाड़ी, मासालवाड़ी, होल, सदोबाची वाडी और सस्तेवाड़ी जैसे गांवों में भारी आर्थिक नुकसान दर्ज किया गया है।
फसलों की बर्बादी का विवरण
तूफानी हवाओं और ओलों के कारण केले, अनार, अमरूद, आम, बैंगन, धनिया, गन्ना और चारे की फसलें पूरी तरह से नष्ट हो गई हैं। व्यक्तिगत तौर पर देखें तो वडगांव निंबालकर के प्रगतिशील किसान अभिषेक शाह का 10 एकड़ में फैला केले का बाग पूरी तरह जमीनदोज हो गया है। इसके अतिरिक्त, उनके 6 एकड़ के अमरूद के बाग को भी ओलों ने भारी क्षति पहुँचाई है, जिससे फलों की गुणवत्ता खराब हो गई है और अब बाजार में सही दाम मिलने की उम्मीद कम है। सस्तेवाड़ी गांव में भी तबाही का मंजर दिखा, जहाँ नितिन कदम का शिमला मिर्च का शेडनेट ओलों के वजन से ढह गया और किशोर कदम की ककड़ी व धनिया की फसलें मलबे में तब्दील हो गईं।
प्रशासनिक कदम और राहत कार्य
भारी नुकसान की खबर मिलते ही कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) बारामती के विशेषज्ञों के साथ कृषि और राजस्व विभाग के अधिकारी प्रभावित गांवों में पहुँचे। सरकारी सहायता सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों ने किसानों से संवाद किया और खेतों में जाकर नुकसान का पंचनामा करना शुरू कर दिया है। कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को तत्काल बचाव के लिए सलाह दी है कि वे खेतों में जमा अतिरिक्त पानी को बाहर निकालें, प्रभावित पौधों की टूटी टहनियों की छंटाई करें और कीटों व फंगस के नियंत्रण के लिए कीटनाशकों का छिड़काव करें।
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बीमा क्लेम और राजनैतिक मांग
प्रशासन ने किसानों से आग्रह किया है कि वे बीमा क्लेम की प्रक्रिया के लिए अपनी बर्बाद फसलों की तस्वीरें खींचकर तुरंत बीमा कंपनी और स्थानीय कृषि अधिकारियों को भेजें। इस बीच, राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरदचंद्र पवार) पार्टी के नेता युगेंद्र पवार ने भी प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और नुकसान का जायजा लिया। उन्होंने फसलों की दुर्दशा पर गहरी चिंता जताते हुए राजस्व विभाग से मांग की है कि पंचनामा का कार्य जल्द पूरा कर पीड़ित किसानों को उचित सरकारी मुआवजा प्रदान किया जाए। यह आपदा मानसून से ठीक पहले किसानों के लिए एक बड़ा आर्थिक आघात साबित हुई है।
