Pune: नीलेश घायवल के घर से मिला गोला-बारूद का बक्सा, पुलिस ने शुरू की जांच

Pune Police ने कोथरूड स्थित गैंगस्टर नीलेश घायवल के घर से सेना के गोला-बारूद कारखाने जैसा अम्युनिशन बॉक्स, दो कारतूस व चार खोके बरामद किए गए हैं।साथ ही मामले की जांच की जा रही है।
Pune Police ने कोथरूड स्थित गैंगस्टर नीलेश घायवल के घर से सेना के गोला-बारूद कारखाने जैसा अम्युनिशन बॉक्स, दो कारतूस व चार खोके बरामद किए गए हैं। साथ ही मामले की जांच और इंटरपोल से संपर्क भी जारी किया जा रहा है।
गैंगस्टर नीलेश घायवल (सौ. सोशल मीडिया )
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Pune News In Hindi: कुख्यात गैंगस्टर नीलेश घायवल के कोथरूड स्थित घर की पुलिस ने तलाशी ली है। इस तलाशी घर से कारतूस, खाली खोके और साथ ही कारतूस रखने वाला लकड़ी का बक्सा (एम्युनिशन बॉक्स) मिला है।

इन सामानों के मिलने के बाद पुणे पुलिस ने सीधे खड़की स्थित गोला-बारूद कारखाना (ऑर्डनेंस फैक्ट्री) के अधिकारियों के साथ पत्र व्यवहार किया है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि सेना के गोला-बारूद कारखाने का यह बक्सा घायवल तक कैसे पहुंचा। इस स्टेशन मामले में कोथरूड पुलिस स्टेशन में घायवल के खिलाफ एक और आपराधिक केस दर्ज किया गया है।

'ब्लू कॉर्नर' नोटिस भी जारी किया गया

फायरिंग मामले में 'मकोका' लगाए जाने के बाद घायवल के खिलाफ अब तक 7 केस दर्ज किए जा चुके हैं। घायवल वर्तमान में यूरोप में है। पुलिस उसके प्रत्यर्पण के लिए अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक पुलिस संगठन (इंटरपोल) से संपर्क कर रही है। घायवल को पकड़ने के लिए 'ब्लू कॉर्नर' नोटिस भी जारी किया गया है।

इसी बीच पुलिस ने उसके कोथरूड स्थित - श्री संत ज्ञानेश्वर कॉलोनी के घर की तलाशी ली है। पुलिस को वहां से दो कारतूस और चार खाली खोके मिले है। उसके घर में कारतूस रखने वाला बक्सा भी मिला है।

यह बक्सा खड़की के गोला-बारूद कारखाने का होने का संदेह है। यह बक्सा खाली है। लेकिन यह बक्सा घायवल तक कैसे पहुंचा, इसकी जांच चल रही है। इसके लिए गोला-बारूद कारखाने के अधिकारियों के साथ पत्र व्यवहार किया गया है।

  • कारतूस रखने वाले बक्से पर '2017' वर्ष का उल्लेख है और उस पर '5.56 एमएम' लिखा है।
  • पुलिस ने बक्से की जांच की तो उसमें एक बड़ा चाकू (सत्तूर) मिला। उसमें कोई कारतूस नहीं था
  • वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि इस बक्से में एक बार में 300 कारतूस रखे जा सकते हैं। सवाल यह है कि सेना के गोला-बारूद कारखाने का यह बक्सा घायवल के घर तक कैसे पहुंचा।
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