उपमुख्यमंत्री अजित पवार (सोर्स: सोशल मीडिया)
Ajit Pawar Statement: उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने राजनीति में वैचारिक गिरावट और धनबल के बढ़ते प्रयोग पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने आगामी निकाय चुनावों से पहले पुणे और पिंपरी-चिंचवड में भाजपा के नेतृत्व और भ्रष्टाचार पर तीखे सवाल उठाए हैं। अजित पवार ने एक विशेष साक्षात्कार में राजनीतिक दलों द्वारा अपने मूल सिद्धांतों को त्यागने पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने दल-बदल की बढ़ती प्रवृत्ति, जांच एजेंसियों का डर और स्थानीय निकायों में वित्तीय कुप्रबंधन जैसे गंभीर मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी है।
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रमुख अजित पवार ने साक्षात्कार के दौरान वर्तमान राजनीति की बदलती दिशा पर गहरा असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में वैचारिक प्रतिबद्धता में लगातार गिरावट आ रही है और अधिकांश राजनीतिक दलों ने अपने मूल सिद्धांतों को तिलांजलि दे दी है। पवार के अनुसार, अब नेता अपनी सुविधानुसार किसी भी दल में आ-जा रहे हैं, जिससे राजनीति की गरिमा प्रभावित हुई है।
अजित पवार ने आरोप लगाया कि नेताओं को या तो प्रलोभन देकर पाले में लाया जा रहा है या फिर उनके खिलाफ लंबित जांचों का डर दिखाकर उन्हें दल बदलने के लिए मजबूर किया जा रहा है। कई मामलों में तो यह आश्वासन भी दिया जाता है कि पार्टी बदलने के बाद जांच एजेंसियां उन पर नरम रुख अपनाएंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में राजनीति में धन और बाहुबल का खुला इस्तेमाल हो रहा है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चिंताजनक है।
उपमुख्यमंत्री ने उम्मीदवारों के चयन के लिए अपनाए जा रहे नए तरीकों की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि अब किसी नेता के कार्यों के बजाय उसकी ‘चुनावी योग्यता’ को प्राथमिकता दी जा रही है। इस रणनीति के तहत उम्मीदवारों की लोकप्रियता का आकलन करने के लिए व्यापक सर्वेक्षणों का उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने खुलासा किया कि यदि सर्वेक्षण में कोई विपक्षी उम्मीदवार लोकप्रिय पाया जाता है, तो सत्ताधारी दल उसे प्रलोभन या दबाव के जरिए अपने पाले में लाने का प्रयास करते हैं। पवार ने इस प्रवृत्ति को जातिगत ध्रुवीकरण और वोट बैंक की राजनीति से जोड़ते हुए कहा कि अब लोग केवल जीतने वाले उम्मीदवार की तलाश में रहते हैं, चाहे उसकी विचारधारा कुछ भी हो।
अजित पवार ने महाराष्ट्र के पहले मुख्यमंत्री यशवंतराव चव्हाण के शासनकाल को याद करते हुए वर्तमान राजनीति पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि चव्हाण साहब के समय में विपक्षी नेताओं को भी समान सम्मान दिया जाता था और धन का वितरण बिना किसी पक्षपात के किया जाता था। हालांकि, उनके अनुसार पिछले कुछ वर्षों में राजनीति में ‘बदले की भावना’ घर कर गई है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विकास कार्यों में पक्ष-विपक्ष का भेद नहीं होना चाहिए, लेकिन आज की स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत हो चुकी है, जहां केवल अपने समर्थकों को ही प्राथमिकता दी जाती है।
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राज्य में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन का हिस्सा होने के बावजूद, अजित पवार ने पुणे और पिंपरी-चिंचवड (PCMC) में भाजपा के स्थानीय नेतृत्व की कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की ‘दूरदर्शिता की कमी’ के कारण ये दोनों समृद्ध नगर निकाय आज संकट के दौर से गुजर रहे हैं। पवार ने दावा किया कि 1992 से 2017 के बीच जब राकांपा सत्ता में थी, तब पिंपरी-चिंचवड का विकास एक सूक्ष्म योजना के साथ किया गया था, जिसके कारण यह एशिया का सबसे समृद्ध नगर निकाय बन गया था। उन्होंने भाजपा के 2017-2022 के कार्यकाल को भ्रष्टाचार और वित्तीय कुप्रबंधन का काल बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि उनके समय में कभी ऋण या बॉण्ड जारी करने की जरूरत नहीं पड़ी, जबकि भाजपा के कार्यकाल में बॉण्ड जारी किए गए और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं व स्वच्छता अभियानों में भारी अनियमितताएं हुईं।
डिप्टीसीएम पवार ने आंकड़ों के साथ भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि पिछले आठ-नौ वर्षों में लगभग 60,000 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जिसमें से 40,000 करोड़ रुपये विकास कार्यों के लिए थे। लेकिन उनके अनुसार, ये कार्य जमीनी स्तर पर कहीं दिखाई नहीं देते। उन्होंने पुणे महानगरपालिका (PMC) का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां सीसीटीवी कैमरे लगाने जैसी परियोजनाओं में भारी भ्रष्टाचार हुआ है और वर्तमान में लगभग 70 प्रतिशत कैमरे काम ही नहीं कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि चूंकि नगर निगम चुनाव स्थानीय मुद्दों पर लड़े जाते हैं, इसलिए वे इन समस्याओं को जनता के बीच मजबूती से उठा रहे हैं।
15 जनवरी को होने वाले 29 महानगरपालिकाओं के चुनावों के बारे में बात करते हुए पवार ने कहा कि पुणे और पिंपरी-चिंचवड में राकांपा के दोनों गुटों (अजित पवार और शरद पवार) के कार्यकर्ताओं ने स्थानीय स्तर पर साथ मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। हालांकि, उन्होंने दोनों गुटों के विलय की किसी भी संभावना को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि ऐसी चर्चाएं केवल मीडिया तक सीमित हैं। उन्होंने अंत में कहा कि उनका पूरा ध्यान अधिक से अधिक सीटें जीतने पर है और मतों की गिनती 16 जनवरी को होगी।