कॉन्सेप्ट फोटो (डिजाइन)
CM Yogi vs Amit Shah: उत्तर प्रदेश की सियासत इन दिनों शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ के इर्द-गिर्द घूम रही है। मौनी अमावस्या के दिन संगम तट से शुरू हुआ विवाद दिन-ब-दिन बड़ा होता जा रहा है। इस विवाद के बीच सियासी गलियारों में चर्चाओं का ऐसा गुबार उठ खड़ा हुआ है जो हैरान कर देने वाला है।
सवाल उठ रहा है कि यह विवाद सीएम योगी को सर्वोच्च सत्ता की दौड़ से बाहर करने की साजिश तो नहीं है? इसके नेपथ्य में सीएम योगी आदित्यनाथ और दोनों उपमुख्यमंत्रियों के बीच पैदा हुआ विरोधाभास और पिछले महीने गुजरात में दिए गए अमित शाह के एक बयान को रखा जा रहा है।
प्रयागराज में माघ मेले के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को स्नान के लिए जाते समय मेला प्रशासन और पुलिस ने रोका था। इस दौरान यहां शंकराचार्य के शिष्यों और पुलिसकर्मियों के बीच झड़प हुई। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने शंकराचार्य के शिष्यों और बटुक ब्राह्मणों को उनकी शिखा पकड़कर खींचा और पिटाई की।
इसके बाद नाराज शंकराचार्य धरने पर बैठ गए और उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर हमलावर हो गए। इसी दौरान प्रयागराज मेला प्रशासन ने दो बार नोटिस जारी कर अविमुक्तेश्वरानंद के शंकराचार्य होने पर सवाल उठाए और दोनों ही बार शंकराचार्य ने वकील के माध्यम से इन नोटिसों का जवाब दिया। इसी दौरान सीएम योगी ने सोनीपत में ‘कालनेमि’ का जिक्र करके मामले को और तूल दे दिया।
इसी दौरान सूबे के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने अविमुक्तेश्वरानंद को पूज्य बताते हुए शंकराचार्य संबोधित किया। उनके बयानों के कई वीडियो सामने आए जिनमें वह शंकराचार्य को मनाते हुए दिखाई दिए। वहीं, अभी हफ्ता भर पहले दूसरे डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने बटुक ब्राह्मणों को अपने आवास पर बुलाकर सम्मानित किया और प्रयागराज में बटुकों की शिखा खींचने की घटना की आलोचना की।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने पहले सोनीपत में कहा कि कुछ ‘कालनेमि’ धर्म की आड़ में सनातन को कमजोर कर रहे हैं। तब उन्होंने शंकराचार्य का जिक्र नहीं किया था, लेकिन विधानसभा में भाषण देते हुए कहा था हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं लिख सकता, हर पीठ के आचार्य के रूप में जाकर जहां-तहां वातावरण खराब नहीं कर सकता।
इन सारे घटनाक्रमों के बीच 27 जनवरी को केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुजरात के गांधी नगर में एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि सनातन का अपमान करने वाले दोबारा सत्ता में नहीं आते। उनके इस बयान को उत्तर प्रदेश की सियासत के लिए बड़े संदेश के तौर पर देखा जा रहा है और सवाल पूछा जा रहा है कि यदि अविमुक्तेश्वरानंद सनातन के दायरे में आते हैं तो क्या अमित शाह का निशाना उनके अपमान का आरोप झेल रहे सीएम योगी आदित्यनाथ पर था?
सीएम योगी अमित शाह व दोनों डिप्टी सीएम (सोर्स- सोशल मीडिया)
जून 2025 में एक कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी के सामने अमित शाह ने केशव प्रसाद मौर्य को ‘मित्र’ कहकर संबोधित किया था। सियासी जानकारों के साथ-साथ सूबे के कुछ भाजपा नेता भी केशव को अमित शाह का करीबी मानते हैं। ऐसे में केशव का अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य कहना और उन्हें पूज्यनीय बताना केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मर्जी के विरुद्ध होना नामुमकिन है।
भारतीय राजनीति में थोड़ी-बहुत भी रुचि रखने वाले को यह बात बखूबी पता है कि केन्द्र मे पीएम मोदी के उत्तराधिकारी के तौर पर अमित शाह और योगी आदित्यनाथ का नाम सामने आता है। रणनीतिक तौर पर अमित शाह फिट हैं लेकिन लोकप्रियता और जनाधार के आधार पर योगी आदित्यनाथ उपयोगी दिखाई देते हैं।
यही वजह है कि एक और चर्चा में यह कहा जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी का शीर्ष नेतृत्व 2029 लोकसभा चुनाव से पहले योगी आदित्यनाथ को फ्रंटलाइन से हटाना चाहता है। अगले साल यूपी में चुनाव है और यह एक मौका हो सकता है। योगी आदित्यनाथ सत्ता से बाहर हुए तो उन्हें शिवराज सिंह चौहान की तरह केन्द्रीय मंत्री बनाया जा सकता है।
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अगर ऐसा होता है तो योगी आदित्यनाथ उत्तराधिकार की दौड़ से बाहर हो जाएंगे और अमित शाह की राह आसान हो जाएगी। लेकिन यह महज चर्चाएं और कयासबाजियां हैं, क्योंकि राजनीति का खेल क्रिकेट से कहीं ज्यादा अनिश्चितताओं से भरा होता है। इससे जुड़े हर सवाल का सही जवाब सही वक्त ही दे पाएगा।