Ajit Pawar Plane Crash AAIB Preliminary Report
Ajit Pawar Plane Crash AAIB Report: अजित पवार विमान हादसे को लेकर पूरे महाराष्ट्र में चल रहे कयासों और ‘साजिश’ के दावों के बीच एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की 22 पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट ने कई अहम खुलासे किए हैं। 28 जनवरी को बारामती में हुए इस दर्दनाक हादसे में अजित पवार समेत पांच लोगों की जान चली गई थी। अब शुरुआती जांच के आंकड़े इशारा कर रहे हैं कि यह हादसा तकनीकी खराबी या साजिश के बजाय खराब मौसम और एयरपोर्ट पर सुविधाओं के अभाव का परिणाम हो सकता है।
सरकार ने भले ही इस मामले की सीबीआई (CBI) जांच की मांग की हो, लेकिन विमानन विशेषज्ञों की यह रिपोर्ट दुर्घटना की कड़ियों को जोड़ने में सबसे महत्वपूर्ण साबित हो रही है।
प्रारंभिक रिपोर्ट में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ है कि विमान में उड़ान भरने से पहले कोई तकनीकी खराबी नहीं थी। जांच के अनुसार, विमान 26 जनवरी को सूरत गया था और वहां से लौटने के बाद 28 जनवरी की सुबह भी तकनीशियनों ने इसे पूरी तरह ‘फिट’ घोषित किया था। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ है कि पायलट और को-पायलट ने किसी भी प्रकार की शराब या नशीले पदार्थ का सेवन नहीं किया था। इससे मानवीय भूल या नशे में विमान उड़ाने की थ्योरी खारिज हो गई है।
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AAIB की रिपोर्ट ने दो गंभीर कमियों की ओर इशारा किया है: दृश्यता (Visibility) और एयरपोर्ट का बुनियादी ढांचा। नियमों के मुताबिक, सुरक्षित लैंडिंग के लिए कम से कम 5 किलोमीटर की दृश्यता होनी चाहिए, लेकिन हादसे के वक्त बारामती में केवल 3 किलोमीटर की दृश्यता थी और घना कोहरा छाया हुआ था। रिपोर्ट में बताया गया है कि बारामती एयरपोर्ट का रनवे 2016 के बाद से रिपेयर नहीं हुआ था और उस पर बने निशान (Markings) इतने धुंधले थे कि पायलट को कोहरे में रनवे पहचानने में भारी दिक्कत हुई।
कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर (CVR) के विश्लेषण से पता चला है कि पायलट ने पहली बार लैंडिंग की कोशिश की लेकिन वह असफल रहा। दूसरी कोशिश के दौरान पायलट ने एटीसी को कहा कि “रनवे दिखाई दे रहा है”, लेकिन कुछ ही सेकंड बाद अचानक “ओह शिट, ओह शिट…” जैसी आवाजें आईं। विमान रनवे से मात्र 50 मीटर दूर बाईं ओर एक पेड़ से टकराया और उसमें भीषण आग लग गई। रिपोर्ट के मुताबिक, बारामती एयरपोर्ट एक ‘अनियंत्रित’ हवाई अड्डा है जहाँ आधुनिक नेविगेशन सुविधाओं और सटीक मौसम जानकारी देने वाले उपकरणों का अभाव था।