MVA में दरार! जानिए क्यों कांग्रेस के इस नेता ने दी शरद पवार और उद्धव ठाकरे से अलग होने की चेतावनी?
Pune MLC Election में MVA में दरार! शरद पवार की पार्टी के उम्मीदवार द्वारा नामांकन वापसी पर कांग्रेस का तीखा हमला। कांग्रस नेता ने इसे विश्वासघात बताते हुए क्या कहां? जानें पूरा विवाद।
- Written By: गोरक्ष पोफली
उद्धव ठाकरे, हर्षवर्धन सपकाल व शरद पवार (सोर्स: डिजाइन फोटो)
MVA Internal Rift: Pune MLC Election में महाविकास अघाड़ी (MVA) के भीतर एक बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया है। शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार श्रीकांत पाटिल द्वारा अचानक अपना नामांकन वापस लेने से महायुति के उम्मीदवार विक्रम काकड़े की निर्विरोध जीत का रास्ता साफ हो गया है। इस घटनाक्रम ने कांग्रेस को बेहद नाराज कर दिया है, और पार्टी ने अब भविष्य में अकेले चुनाव लड़ने का संकेत दिया है।
कांग्रेस के साथ हुआ विश्वासघात: प्रशांत जगताप
पुणे कांग्रेस के शहर अध्यक्ष प्रशांत जगताप ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे कांग्रेस पार्टी और मतदाताओं के साथ किया गया एक बड़ा विश्वासघात करार दिया है। जगताप के अनुसार, पुणे क्षेत्र में कांग्रेस का संख्या बल सबसे अधिक था और पार्टी के पास सबसे ज्यादा मतदाता थे। कांग्रेस ने इस सीट पर अपना स्वाभाविक दावा पेश किया था और इस संबंध में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से चर्चा भी हुई थी।
बड़े भाई की भूमिका पड़ी महंगी
जगताप ने खुलासा किया कि शरद पवार की पार्टी ने महाराष्ट्र की 17 सीटों में से केवल दो सीटों पुणे और सतारा के लिए बहुत आग्रह किया था। कांग्रेस ने गठबंधन धर्म निभाते हुए और बड़े भाई की भूमिका में उदारता दिखाते हुए यह सीट शरद पवार के गुट के लिए छोड़ दी थी। कांग्रेस का मानना था कि चुनाव लड़कर भाजपा और महायुति को कड़ा संदेश दिया जाएगा, लेकिन ऐन वक्त पर नामांकन वापस लेना कांग्रेस की समझ से परे है।
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अब स्वबल का नारा: क्यों लिया यह फैसला?
प्रशांत जगताप ने कहा कि यदि सहयोगी दल महायुति के सामने इस तरह सरेंडर होने की भूमिका अपना रहे हैं, तो यह मतदाताओं के साथ धोखा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस अब भविष्य में अपने दम पर लड़ने की भूमिका ले सकती हैं। मतदाताओं के हितों की रक्षा के लिए राष्ट्रवादी या शिवसेना के बजाय कांग्रेस स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ना पसंद करेगी। पुणे में जो कुछ भी हुआ, उसकी पूरी रिपोर्ट पार्टी के हाई कमांड के सामने रखी जाएगी।
इस घटना ने न केवल महाविकास अघाड़ी की एकजुटता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं, बल्कि पुणे की राजनीति में कांग्रेस और शरद पवार की पार्टी के बीच एक गहरी खाई भी पैदा कर दी है। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि इस कदम से कार्यकर्ताओं में भारी असंतोष है, जिसका असर आगामी चुनावों पर भी पड़ सकता है।
