सरकारी दफ्तर जाने की मजबूरी खत्म? महाराष्ट्र सरकार ने जारी किया नया फरमान, बदल गए ये 5 बड़े नियम
Maharashtra Govt Process Reengineering: महाराष्ट्र सरकार ने 'प्रोसेस री-इंजीनियरिंग' के तहत 5 बड़े प्रशासनिक सुधार लागू किए हैं। अब डिजीलॉकर और ऑनलाइन डेटा से सीधे काम होंगे।
- Written By: आकाश मसने
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (डिजाइन फोटो)
Maharashtra Administrative Reforms 5 Key Changes: महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता लाने और आम जनता को दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति दिलाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने सभी प्रशासनिक विभागों में ‘प्रोसेस री-इंजीनियरिंग’ के तहत 5 ऐतिहासिक सुधार लागू करने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सरकारी दफ्तरों में जाकर काम कराने की मजबूरी को खत्म करना, फाइलों की मंजूरी के प्रशासनिक चरणों को कम करना और जनता तक सरकारी सेवाएं तेजी से पहुंचाना है।
राज्य योजना विभाग द्वारा जारी सरकारी आदेश (GR) के मुताबिक, ‘गवर्नमेंट प्रोसेस री-इंजीनियरिंग’ (GPR) पहल का मकसद सरकारी कल्याणकारी योजनाओं और रोजमर्रा की प्रशासनिक सेवाओं को पूरी तरह पारदर्शी, सुलभ और डिजिटल-फर्स्ट बनाना है।
1. दफ्तरों के चक्कर खत्म, पूरी तरह ऑनलाइन वेरिफिकेशन
नए जीआर के अनुसार, सभी विभागों को अब पूरी तरह से ऑनलाइन वेरिफिकेशन और डिजिटल वैलिडेशन सिस्टम पर निर्भर रहना होगा। नागरिकों के डेटा को मौजूदा सरकारी डेटाबेस और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से सीधे ऑटो-फेच करके आवेदन फॉर्म को बेहद आसान बनाया जाएगा।
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2. फिजिकल डॉक्यूमेंट्स जमा करने की जरूरत नहीं
जहां भी डिजिटल रिकॉर्ड पहले से मौजूद हैं, वहां नागरिकों से कागजी दस्तावेज मांगने की प्रक्रिया पूरी तरह खत्म कर दी जाएगी। इसके लिए डिजीलॉकर और एपीआई इंटरऑपरेबिलिटी का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा, अब सरकारी काम मुख्य रूप से नागरिक के सेल्फ-डिक्लेरेशन पर ही आधारित होंगे।
3. निर्णय प्रक्रिया में अधिकतम 3 स्तर
नौकरशाही की देरी और लालफीताशाही को खत्म करने के लिए किसी भी फाइल या फैसले को ज्यादा से ज्यादा तीन प्रशासनिक स्तरों तक ही सीमित रखा जाएगा। हर स्तर पर अधिकारियों की भूमिकाएं स्पष्ट तय होंगी ताकि कोई भी फाइल बिना वजह अटकी न रहे।
4. ‘राइट टू सर्विसेज’ एक्ट के तहत तय समय-सीमा
‘राइट टू सर्विसेज’ (RTS) एक्ट के तहत कानूनी समय-सीमा को अपडेट किया जाएगा और लेटेस्ट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके आवेदन के निपटारे (प्रोसेसिंग टाइम) में लगने वाले समय को काफी घटाया जाएगा।
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5. मुख्य सचिव की निगरानी और महा-आईटी को जिम्मा
इस पूरे बदलाव और डिजिटल वर्कफ़्लो की निगरानी मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली राज्य-स्तरीय जीपीआर मंजूरी समिति करेगी। वहीं, सरकारी पोर्टल में जरूरी बदलाव करने और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की जिम्मेदारी राज्य की आईटी एजेंसी ‘महा-आईटी’ को प्राथमिकता के आधार पर सौंपी गई है।
इससे पहले भी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य में तेजी से फैसले लेने के लिए “जीरो ब्यूरोक्रेसी” मॉडल और प्रशासनिक पुनर्गठन पर जोर दिया था। हाल ही में राज्य कैबिनेट ने बिना कोई नया पद बनाए प्रशासनिक विभागों की संख्या 33 से बढ़ाकर 45 करने को भी हरी झंडी दी थी।
