राज्यसभा सांसद पद की शपथ लेने के बाद उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन के साथ पार्थ पवार व अन्य (सोर्स: सोशल मीडियसा)
Parth Pawar Rajya Sabha MP Oath Ceremony: महाराष्ट्र की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत हो गई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दिग्गज नेता और दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद, पवार परिवार और पार्टी अब नए नेतृत्व की ओर देख रही है। जहां एक तरफ पार्टी की कमान सुनेत्रा पवार मजबूती से संभाल रही हैं, वहीं दूसरी ओर आज उनके पुत्र पार्थ पवार ने आधिकारिक तौर पर देश के उच्च सदन यानी राज्यसभा के सदस्य के रूप में शपथ ग्रहण की।
संसद भवन के भव्य गलियारों में आज का दिन बेहद भावुक रहा। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान सबकी निगाहें पार्थ पवार के पहनावे पर टिकी थीं। पार्थ ने इस विशेष अवसर पर वही नेहरू जैकेट पहनी थी, जो उनके पिता अजित पवार की पहचान मानी जाती थी। राजनीतिक गलियारों में इसे केवल एक वस्त्र नहीं, बल्कि एक ‘विरासत के हस्तांतरण’ के रूप में देखा जा रहा है। समर्थकों का मानना है कि पार्थ ने गुलाबी जैकेट पहनकर यह संदेश दिया है कि वह अपने पिता के अधूरे सपनों और उनके काम करने के कड़क अंदाज को आगे ले जाएंगे।
आज संसद भवन में आयोजित एक संक्षिप्त लेकिन गरिमापूर्ण समारोह में उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने पार्थ पवार को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ लेने के बाद पार्थ ने सदन के वरिष्ठ नेताओं का अभिवादन किया। इस दौरान उनके चेहरे पर जिम्मेदारी का भाव साफ झलक रहा था।
Watch: NCP leader late Ajit Pawar’s son Parth Pawar took the oath as a member of the Rajya Sabha (Source: Sansad TV) pic.twitter.com/1U3kFkBKv7 — IANS (@ians_india) April 9, 2026
शपथ ग्रहण के दौरान केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार, एनसीपी नेता प्रफुल पटेल सनील तटकरे, और कांग्रेस नेता जयराम रमेश भी मौजूद थे।
अजित पवार के जाने के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर जो कयास लगाए जा रहे थे, उन पर अब विराम लग चुका है। सुनेत्रा पवार ने जिस तरह से संगठन को एकजुट रखा है, उससे कार्यकर्ताओं में नया उत्साह है। अब पार्थ पवार के दिल्ली (केंद्र) की राजनीति में सक्रिय होने से महाराष्ट्र में एनसीपी की पकड़ और मजबूत होने की उम्मीद है।
पार्थ पवार के लिए यह कार्यकाल चुनौतियों भरा होने वाला है, क्योंकि उन्हें न केवल खुद को एक परिपक्व राजनेता के रूप में साबित करना है, बल्कि अजित दादा के समर्थकों की उम्मीदों पर भी खरा उतरना है।