'दुनिया की जरूरतों के मुताबिक बदलें अपना सिलेबस', उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने यूनिवर्सिटीज को दिया खास मंत्र

C.P. Radhakrishnan Speech: उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने रतन टाटा कौशल विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में आधुनिक शिक्षा और सॉफ्ट स्किल्स पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य तकनीकी महारत का है।
C.P. Radhakrishnan On Modern Education Curriculum
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन को भेंट प्रदान करते मंत्री मंगल प्रताप लोढा व मंच पर मौजूद राज्यपाल, मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री (सोर्स: सोशल मीडिया)
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C.P. Radhakrishnan On Modern Education Curriculum: शिक्षा और रोजगार के बीच बढ़ती खाई को पाटने के लिए देश में बड़े बदलावों की सुगबुगाहट तेज हो गई है। शनिवार को मुंबई के लोक भवन में आयोजित 'रतन टाटा महाराष्ट्र राज्य कौशल विश्वविद्यालय' (RTMSSU) के पहले दीक्षांत समारोह में देश के उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने शिक्षा जगत को एक नई दिशा दिखाने वाला संबोधन दिया।

आधुनिक और वैज्ञानिक पाठ्यक्रम की जरूरत

उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने दो टूक शब्दों में कहा कि अब पुराने ढर्रे पर चलने का समय बीत चुका है। उन्होंने जोर दिया कि विश्वविद्यालयों को अपने पाठ्यक्रम को 'दुनिया की जरूरतों' के अनुरूप ढालना होगा। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया तेजी से बदल रही है, ऐसे में हमारे पाठ्यक्रम आधुनिक और वैज्ञानिक होने चाहिए, ताकि हमारे छात्र वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें।

कौशल विकास ही असली ताकत

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने अपने भाषण में 'अनुकूलन क्षमता' (Adaptability) को सफलता की सबसे बड़ी चाबी बताया। उन्होंने कहा कि देश की असली ताकत इमारतों या संसाधनों में नहीं, बल्कि उसके लोगों की क्षमताओं में निहित है। उन्होंने स्नातक छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि भविष्य उन लोगों का है जो तकनीकी कौशल के साथ-साथ व्यवहारिक कौशल जैसे कम्युनिकेशन स्किल, टीम वर्क, अनुकूलन क्षमता, भावनात्मक बुद्धिमत्ता (Emotional Intelligence) का तालमेल बिठाना जानते हैं। उनके अनुसार, केवल किताबी ज्ञान अब पर्याप्त नहीं है; इंडस्ट्री की मांग के अनुसार कौशल का होना अनिवार्य है।

रतन टाटा की विरासत और सामाजिक जिम्मेदारी

विश्वविद्यालय के नाम का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि रतन टाटा की विरासत हमें सिखाती है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी पाना नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनना भी है। उन्होंने संस्थानों से आह्वान किया कि वे न केवल स्किल्ड वर्कफोर्स तैयार करें, बल्कि छात्रों में नैतिक मूल्यों और सामाजिक दायित्व की भावना भी भरें।

नशामुक्त अभियान और गार्ड ऑफ ऑनर

समारोह के दौरान उपराष्ट्रपति ने एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहल नशामुक्त अभियान 'Say No to Drugs' की शुरुआत की। उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की अपील की। कार्यक्रम के बाद उन्होंने कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) के तहत विभिन्न उद्योग भागीदारों द्वारा लगाई गई एक विशेष प्रदर्शनी का भी दौरा किया, जहां उन्होंने शिक्षा और उद्योग के संगम को करीब से देखा।

उपराष्ट्रपति को दिया गया गार्ड ऑफ ऑनर

इस ऐतिहासिक दीक्षांत समारोह में महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार और कौशल विकास मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। इससे पहले, मुंबई हवाई अड्डे पर पहुंचने पर उपराष्ट्रपति का भव्य स्वागत किया गया और लोक भवन में उन्हें 'गार्ड ऑफ ऑनर' भी दिया गया।

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