वसई-विरार में जहरीले धुएं का खतरा, रात में चल रहे आरएमसी और डामर प्लांट से बिगड़ी हवा
Vasai Virar Air Pollution RMC News: वसई-विरार में रात के समय संचालित हो रहे डामर और आरएमसी प्लांटों से निकलने वाले जहरीले धुएं ने नागरिकों की सेहत और पर्यावरण पर गंभीर खतरा पैदा कर दिया है।
- Written By: अपूर्वा नायक
वसई विरार एयर पॉल्यूशन (सोर्सः सोशल मीडिया)
Vasai Virar Air Pollution RMC News: वसई-विरार शहर विकास की दौड़ में तो आगे निकल रहा है, लेकिन इसकी कीमत स्थानीय नागरिकों को अपनी सेहत देकर चुकानी पड़ रही है।
मुंबई-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित मालजीपाड़ा और ससुनावघर जैसे इलाकों में इन दिनों डामर और सीमेंट कंक्रीट आरएमसी परियोजनाओं की बाढ़ आ गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि प्रशासनिक कार्रवाई से बचने के लिए ये प्लांट मुख्य रूप से रात के सन्नाटे में संचालित किए जा रहे हैं, जिससे निकलने वाला जहरीला धुआं समूचे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले रहा है।
सफेद धुएं की चादर में लिपटा शहर
वसई विरार महानगरपालिका आयुक्त पृथ्वीराज बी।पी। ने इस संदर्भ में शहर के एयर क्वालिटी इंडेक्स पर चिंता जताई थी, लेकिन जमीनी हकीकत जस की तस बनी हुई है। चाहे हाईवे किनारे लगे आरएमसी प्लांट हों या गोखीवरे का डंपिंग ग्राउंड, रात होते ही ये इलाके सफेद धुएं की मोटी चादर से ढक जाते हैं। यह धुआं न केवल दृश्यता कम कर रहा है, बल्कि वसई-विरार के फेफड़ों पर भी सीधा प्रहार कर रहा है।
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राजमार्ग के किनारे स्थित परियोजनाओं को प्रदूषण नियंत्रण के कड़े दिशा-निर्देश दिए गए हैं। स्क्रबर सिस्टम लगाना अनिवार्य है। यदि कोई रात के समय नियमों का उल्लंघन कर गुपचुप तरीके से प्रदूषण फैला रहा है, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
– आनंद काटोले अधिकारी, ठाणे-पालघर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
प्रदूषण बोर्ड के नियमों की सरेआम धज्जियां
सड़क निर्माण और विकास कार्यों की आड़ में डामर की मांग बढ़ी है, जिसका फायदा उठाकर कई संचालक बिना किसी पलूशन कंट्रोल सिस्टम के प्लांट चला रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के स्पष्ट निर्देश हैं कि औद्योगिक प्रक्रियाओं से निकलने वाली खतरनाक गैसों को रोकने के लिए स्क्रबर सिस्टम अनिवार्य है। बावजूद इसके, कई परियोजना संचालक लागत बचाने के चक्कर में जहरीली गैसों को सीधे हवा में छोड़ रहे हैं।
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जनजीवन पर गहराता संकट, बंजर हो रही जमीन
रात भर निकलने वाले तीखे धुएं के कारण नागरिकों को सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन और गले में खराश जैसी शिकायते आम हो गई है। बुजुर्गों और बच्चों के लिए यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है। हाईवे किनारे की कृषि भूमि पर सीमेट की धूल की परत जम रही है, जिससे उपजाऊ जमीन बंजर होती जा रही है। कभी हरियाली के लिए मशहूर यह क्षेत्र अब धूल और धुएं के कारण अपनी प्राकृतिक सुंदरता खो रहा है।
