FDA ने पालघर में आयुर्वेदिक दवा कंपनी पर छापा मारा, 3 लाख की दवाइयां जब्त, प्रबंधन में मचा हड़कंप
महाराष्ट्र के पालघर जिले में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने एक कंपनी पर छापामार कार्रवाई की और लाखों आयुर्वेदिक दवाएं जब्त की। एफडीए ने कंपनी से कई दवाएं के सैम्पल लिए...
- Written By: आकाश मसने
खाद्य एवं औषधि प्रशासन, महाराष्ट्र (सोर्स: सोशल मीडिया)
पालघर: महाराष्ट्र के पालघर जिले में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने एक कंपनी पर छापामार कार्रवाई की और लाखों आयुर्वेदिक दवाएं जब्त की। इस कार्रवाई के कंपनी प्रबंधन में हड़कंप मच गया। एफडीए ने कंपनी से कई दवाएं के सैम्पल लिए। इन सैम्पलों की आगे जांच की जाएगी। जांच में गड़बड़ी पाई गई तो कंपनी पर कानूनी कार्रवाई होगी।
महाराष्ट्र सरकार के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने सोमवार को बताया कि उसने पालघर जिले में एक आयुर्वेदिक उत्पाद निर्माण कंपनी के परिसर पर छापेमारी कर मानदंडों के उल्लंघन का पता लगाया है।
एफडीए ने एक बयान में कहा कि उसके अधिकारियों ने 8 जनवरी को पालघल जिले में वाडा तालुका के धाकीवली गांव में ‘शीतल मेडिकेयर प्रोडक्ट्स प्राइवेट’ नामक कंपनी के परिसर पर छापेमारी कर 3 लाख 9 हजार 23 रुपये मूल्य की आयुर्वेदिक दवाएं जब्त कीं।
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औषधि एवं चमत्कारिक उपचार (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम का उल्लंघन
एफडीए ने बताया कि जब्त उत्पाद औषधि एवं चमत्कारिक उपचार (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम, 1954 की धारा तीन (D) का उल्लंघन कर रहे थे। यह कानून गुमराह करने वाली दवाओं के बारे में आपत्तिजनक दावों और विज्ञापनों पर रोक लगाता है।
कंपनी से नमूने लिए गए
बयान में कहा गया है कि पालघर के औषधि निरीक्षकों ने आगे की जांच के लिए कंपनी से नमूने लिए ताकि इस बात की पता लगाया जा सके कि विनिर्माण और सुरक्षा मानकों का अनुपालन किया जा रहा है। एफडीए ने संकेत दिया कि इन नमूनों की गहन जांच की जाएगी और परिणाम के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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क्या है अधिनियम?
औषधि और जादुई उपचार (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम, 1954 भ्रामक विज्ञापनों के माध्यम से दवाओं और उपचारों को बढ़ावा देने पर रोक लगाने के लिए बनाया गया है। इस विज्ञापनों में बीमारियों को ठीक करने या शारीरिक विशेषताओं को बढ़ाने के बारे में झूठे दावे किये जाते हैं। ऐसे उल्लंघनों पर जुर्माना और कारावास समेत कठोर दंड का प्रावधान है।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
