पिता की हत्या के आरोपी बरी फिर भी शिंदे गुट में क्यों शामिल हुए निंबालकर? शिंदे ने खुद बताई वजह
Omraje Nimbalkar Joins Shinde Sena: पवनराजे हत्याकांड में आरोपियों के बरी होने के बाद भी ओमराजे शिंदेसेना में क्यों शामिल हुए? एकनाथ शिंदे ने खुद 'पारिवारिक समस्या' सुलझाने का वचन देकर बताई वजह
- Written By: गोरक्ष पोफली
ओमराज निंबालकर और एकनाथ शिंदे (सोर्स: सोशल मीडिया)
Eknath Shinde Statement On Pawanraje Murder Case: महाराष्ट्र की राजनीति में ऑपरेशन टाइगर की सफलता के बाद अब सबकी नजरें उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के उस ‘वचन’ पर टिक गई हैं, जो उन्होंने खुले मंच से सांसद ओमराजे निंबालकर को दिया है। सोमवार को ठाकरे गुट के 6 बागी सांसदों के आधिकारिक प्रवेश के दौरान शिंदे ने न केवल राजनैतिक समर्थन का वादा किया, बल्कि एक बेहद व्यक्तिगत और भावनात्मक कार्ड भी खेला। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पार्टी राजनीतिक मदद तो करेगी ही, लेकिन यदि किसी कार्यकर्ता या नेता की कोई पारिवारिक समस्या है, तो उसे वह अपने परिवार की समस्या मानकर हल करेंगे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शिंदे का इशारा स्पष्ट रूप से धाराशिव के सांसद ओमराजे निंबालकर की तरफ था। गौरतलब है कि ओमराजे के पिता और कांग्रेस नेता पवनराजे निंबालकर की 3 जून 2006 को नवी मुंबई में दिन-दहाड़े हत्या कर दी गई थी। हाल ही में, 20 जून 2026 को मुंबई की सेशंस कोर्ट ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में मुख्य आरोपी पूर्व गृहमंत्री डॉ. पद्मसिंह पाटील सहित सभी 9 आरोपियों को ‘सबूतों के अभाव’ में बरी कर दिया है। इस फैसले से निंबालकर परिवार को बड़ा झटका लगा है। अब शिंदे के पारिवारिक समस्या सुलझाने वाले बयान को सीधे तौर पर इस केस से जोड़कर देखा जा रहा है।
CBI की अपील और अमित शाह की ‘सीरियसनेस’
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पवनराजे निंबालकर हत्याकांड के इस फैसले को लेकर केवल राज्य सरकार ही नहीं, बल्कि केंद्र भी सक्रिय हो गया है। उपमुख्यमंत्री शिंदे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से विस्तार से चर्चा की है, जिसके बाद यह स्पष्ट हुआ है कि केंद्र इस मुद्दे पर काफी गंभीर है। इसी का परिणाम है कि CBI ने अब ट्रायल कोर्ट के फैसले को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती देने की आधिकारिक घोषणा कर दी है।
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आदित्य ठाकरे का प्रहार और ओमराजे का ‘धर्मसंकट’
दूसरी तरफ, शिवसेना (UBT) के नेता आदित्य ठाकरे ने इन बागी सांसदों पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें बिकाऊ और एहसान फरामोश करार दिया है। उन्होंने कहा कि इन लोगों ने अपनी प्रतिष्ठा और परिवार का नाम दांव पर लगा दिया है। हालांकि, ओमराजे निंबालकर ने पहले ही अपनी मजबूरी जाहिर करते हुए कहा था कि वह एक बड़े ‘धर्मसंकट’ में हैं, जहां भावनात्मक रूप से पार्टी छोड़ना गलत लगता है, लेकिन राजनीतिक अस्तित्व और फंड के लिए यह जरूरी है।
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अब सवाल यह है कि क्या एकनाथ शिंदे अपना वह वचन पूरा कर पाएंगे, जिसके तहत उन्होंने ओमराजे निंबालकर की पारिवारिक समस्या (पिता के लिए न्याय) को अपना बनाने का वादा किया है? महाराष्ट्र की जनता और विपक्षी दल अब यह देखने को उत्सुक हैं कि हाई कोर्ट में CBI की यह अपील क्या नया मोड़ लेती है।
