गोंडिया: बिना सरकारी बजट के नवेगांव जलाशयकी 2 साल में बढ़ी 2.80 करोड़ लीटर क्षमता, ‘नवेगांव पैटर्न’ बना मिसाल
Navegaon Bandh Reservoir: नवेगांव जलाशय में जनभागीदारी से जल संरक्षण की मिसाल बनी। बिना सरकारी खर्च के 2 साल में जलाशय की क्षमता 2.80 करोड़ लीटर बढ़ गई है। पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।
- Written By: केतकी मोडक
नवेगांवबांध जलाशय (सोर्स- फोटो नवभारत)
Navegaon Bandh Reservoir Desiltation Project: जल संरक्षण के क्षेत्र में नवेगांव जलाशय ने जनभागीदारी के माध्यम से एक नई मिसाल कायम की है। जहां कई बार सरकारी योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाते, वहीं स्थानीय किसानों, नागरिकों और ट्रैक्टर-जेसीबी मालिकों के सहयोग से बिना सरकारी निधि के जलाशय का गहराईकरण कर जल भंडारण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। इस अभियान ने पूरे जिले में ‘नवेगांव पैटर्न’ के रूप में नई पहचान बनाई है।
जल संसाधन विभाग द्वारा संचालित ‘गाद मुक्त बांध व गाद युक्त शिवार’ अभियान के तहत पिछले छह दिनों में किसानों और वाहन मालिकों ने अपने खर्च पर लगभग 5,500 ब्रास गाद निकालकर अपने खेतों तक पहुंचाई। इस कार्य से नवेगांव जलाशय की जल भंडारण क्षमता में 15.57 मिलियन लीटर अर्थात लगभग 1.55 करोड़ लीटर की वृद्धि दर्ज की गई। यह उपलब्धि क्षेत्र के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है।
अभियान का पहला चरण पिछले वर्ष चलाया गया था, जिसमें जलाशय की क्षमता में लगभग 1.25 करोड़ लीटर की बढ़ोतरी हुई थी। इस वर्ष की उपलब्धि को जोड़ने पर अब तक कुल 2.80 करोड़ लीटर से अधिक अतिरिक्त जल भंडारण क्षमता विकसित हो चुकी है। इससे आने वाले वर्षों में जल संकट से राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। इसका श्रेय जल संसाधन विभाग के उपविभागीय अधिकारी समीर बनसोडे के प्रभावी नियोजन और सकारात्मक पहल को दिया जा रहा है।
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उपजाऊ मिट्टी खेतों में ले जाने का लाभ
उन्होंने केवल सरकारी मंजूरियों और बजट पर निर्भर रहने के बजाय स्थानीय किसानों और वाहन मालिकों को विश्वास में लेकर जनसहभागिता का सफल मॉडल तैयार किया। किसानों को जलाशय की उपजाऊ मिट्टी अपने खेतों में ले जाने का लाभ मिला, वहीं जलाशय का गहराईकरण भी तेजी से पूरा हुआ। उनके इस कार्य की प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक सराहना हो रही है।
जल भंडारण क्षमता बढ़ने का सीधा लाभ नवेगांवबांध और आसपास के गांवों को मिलेगा। जलाशय में अधिक पानी संग्रहित होने से भूजल स्तर में सुधार होगा, जिससे गर्मियों में कुएं और बोरवेल सूखने की समस्या कम होगी। साथ ही खरीफ सीजन और रबी दोनों मौसम में किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सकेगा। इससे कृषि उत्पादन बढ़ने के साथ ग्रामीणों की पेयजल समस्या भी काफी हद तक दूर होने की उम्मीद है।
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नवेगांव पैटर्न बनेगा अन्य क्षेत्रों के लिए प्रेरणा
स्थानीय किसानों और नागरिकों का मानना है कि यदि प्रशासन और समाज मिलकर कार्य करें तो बिना बड़े सरकारी खर्च के भी प्रभावी जल संरक्षण संभव है। उनका कहना है कि उपविभागीय अधिकारी समीर बनसोडे के दूरदर्शी नेतृत्व और जनसहभागिता के कारण यह अभियान सफल हुआ है। नवेगांव जलाशय का यह मॉडल अब गोंदिया जिले ही नहीं, बल्कि अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणादायी उदाहरण बनकर उभर रहा है।
