नासिक में 1120 करोड़ का यूरिया घोटाला, किसानों के हक पर डाका; तेलंगाना मॉडल लागू करने की मांग तेज विरोध जारी

Nashik Urea Black Marketing: नासिक में 1120 करोड़ रुपये के सब्सिडी वाले यूरिया की कालाबाजारी का खुलासा। 80% खाद अवैध बाजार में जाने का आरोप, किसानों ने की तेलंगाना मॉडल लागू करने की मांग।
A ₹1120 cr urea black marketing scam hits Nashik. With 80% subsidy diverted, farmers demand the Telangana model to curb corruption and ensure fair distribution.
यूरिया (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
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Nashik Urea Scam: नासिक विभाग में किसानों को अनुदानित दर पर उपलब्ध कराए जाने वाले यूरिया-खाद के बड़े पैमाने पर कालाबाजार में जाने का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि इस पूरे रैकेट को स्थानीय राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। खरीफ और रबी सीजन के दौरान नासिक विभाग में करीब 1,120 करोड़ रुपये मूल्य के सब्सिडी वाले यूरिया की कालाबाजारी होने का अनुमान व्यक्त किया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, सरकार किसानों को राहत देने के लिए यूरिया पर भारी सब्सिडी देती है। नासिक विभाग को प्रतिवर्ष लगभग 3 लाख 50 हजार मीट्रिक टन यूरिया की आवश्यकता होती है। सरकार एक टन यूरिया पर करीब 40 हजार रुपये की सब्सिडी देती है। इस आधार पर विभाग के लिए कुल सब्सिडी खर्च लगभग 1400 करोड़ रुपये बैठती है। आरोप है कि इसमें से करीब 80 प्रतिशत यूरिया काले बाजार में पहुंच जाता है, जबकि केवल 20 प्रतिशत ही वास्तविक किसानों तक पहुंच पाता है।

सूखा प्रभावित क्षेत्रों में हो रही अधिक धांधली

कृषि विभाग में चर्चा है कि कम वर्षा और सूखा प्रभावित क्षेत्रों में यह गड़बड़ी अधिक हो रही है। ऐसे क्षेत्रों में वास्तविक मांग कम होने के बावजूद बड़ी मात्रा में यूरिया उठाया जाता है। बाद में किसानों के नाम पर कागजों में विक्री दर्शाकर इस स्टॉक को अन्य क्षेत्रों में अधिक कीमत पर बेचा जाता है।

नांदगांव, येवला, सिन्नर और मालेगांव तहसीलों में यह गतिविधि बड़े पैमाने पर होने की चर्चा है। सूत्रों के मुताबिक कुछ रैकेट उजागर होने के बावजूद राजनीतिक दबाव के कारण मामले दर्ज नहीं किए जा रहे हैं। कृषि सहसंचालक कार्यालय के अंतर्गत आने वाले नासिक विभाग में करीब 8,300 खाद बिक्री केंद्र हैं, जबकि उनकी जांच के लिए केवल 80 निरीक्षक तैनात हैं।

तेलंगाना मॉडल की चर्चा

  • एक तहसील में औसतन 2 निरीक्षक होने से निगरानी व्यवस्था कमजोर पड़ रही है, जिसका फायदा कालाबाजारी करने वाले उठा रहे है। बताया जा रहा है कि निरीक्षकों को दोषी विक्रेताओं के खिलाफ सीधे कार्रवाई करने का अधिकार भी नहीं है।
  • इस कारण नियंत्रण तंत्र प्रभावी साबित नहीं हो पा रहा है। यूरिया कालाबाजारी रोकने के लिए तेलंगाना में लागू मॉडल की चर्चा भी तेज हो गई है।
  • वहां सरकार ने यूरिया बिक्री व्यवस्था पूरी तरह अपने नियंत्रण में ले रखी है और निजी विक्रेताओं पर प्रतिबंध लगाया गया है।
  • इसके चलते किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध होने का दावा किया जा रहा है। किसानों का कहना है कि महाराष्ट्र सरकार को भी तेलंगाना मॉडल अपनाने पर विचार करना चाहिए।
  • साथ ही गांव स्तर की सहकारी सोसायटियों के माध्यम से खाद वितरण व्यवस्था फिर से शुरू करने की मांग भी उठाई जा रही है।
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