त्र्यंबकेश्वर कॉलेज में मराठी अभिजात भाषा दिवस उत्साहपूर्वक संपन्न, प्राध्यापकों और छात्रों की उपस्थिति

Tryambakeshwar College: त्र्यंबकेश्वर के एमवीपी समाज के कला, वाणिज्य एवं विज्ञान महाविद्यालय में ‘मराठी अभिजात भाषा गौरव दिवस’ उत्साह के साथ मनाया गया।
tryambakeshwar college marathi classical language day
त्र्यंबकेश्वर कॉलेज(सोर्सः सोशल मीडिया)
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Marathi Classical Language Day: मराठा विद्या प्रसारक समाज के कला, वाणिज्य एवं विज्ञान महाविद्यालय, त्र्यंबकेश्वर में मराठी विभाग के तत्वावधान में 'मराठी अभिजात भाषा गौरव दिवस' अत्यंत उत्साह के साथ मनाया गया. कार्यक्रम की मुख्य अतिथि एवं मराठी विभागाध्यक्ष डॉ. शालिनी पाटील ने अपने प्रस्तावना भाषण में मराठी भाषा को 'अभिजात भाषा' (शास्त्रीय भाषा) का दर्जा मिलने के विविध मानकों और मानदंडों पर प्रकाश डाला.

उन्होंने कहा कि मराठी भाषा को समृद्ध संत परंपरा की विरासत मिली है. इस दौरान उन्होंने संत ज्ञानेश्वर की 'ज्ञानेश्वरी', संत तुकाराम, संत एकनाथ तथा संत रामदास स्वामी के 'दासबोध' ग्रंथ के विभिन्न उदाहरण और संदर्भ प्रस्तुत करते हुए छात्रों को मराठी अभिजात भाषा का विस्तृत महत्व समझाया. समारोह में हिंदी विभाग के प्राध्यापक समाधान गांगुर्डे ने भी मराठी अभिजात भाषा पर अपने विचार व्यक्त किए. महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सोमनाथ घुले ने संत ज्ञानेश्वरी की प्रसिद्ध पंक्तियों "माझा मराठीची बोलू कौतुके से लेकर झोपडी कविता का सुरीले कंठ से गायन किया.

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मराठी भाषा के संरक्षण और संवर्धन का संदेश

उन्होंने अपने अध्यक्षीय भाषण में छात्रों को मराठी भाषा के संरक्षण और संवर्धन का संदेश दिया. इस कार्यक्रम का मंच संचालन मराठी विभाग की डॉ. ललिता सोनवणे ने किया. कार्यक्रम में परीक्षा प्रमुख डॉ. नगरकर, आईक्यूएसी समन्वयक डॉ. सोनवणे, इतिहास विभाग की प्रा. ठोके, अर्थशास्त्र विभाग की प्रा. श्रीमती सुलक्षणा कोळी, प्रा. भेरे, प्रा. विष्णु दिघे सहित बड़ी संख्या में शिक्षक एवं छात्र उपस्थित रहे. अंत में डॉ. ललिता सोनवणे ने सभी अतिथियों व उपस्थित जनसमूह का आभार व्यक्त किया.

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वाचन के महत्व पर उर्दू लाइब्रेरी में शानदार चर्चासत्र

वहीं दूसरे एक कार्यक्रम में उर्दू लाइब्रेरी ट्रस्ट, मालेगांव की ओर से मोहम्मद सिद्दीक मुस्लिम हॉल में शनिवार 3 अक्टूबर को 'वाचन का महत्व एवं उपयोगिता' विषय पर चर्चासत्र आयोजित किया गया। अध्यक्षता सेवानिवृत्त शिक्षक एवं मिर्ज़ा ग़ालिब के अभ्यासक श्री सईद परवेज़ ने की। मालेगांव सीनियर कॉलेज के अंग्रेज़ी, इतिहास, राज्यशास्त्र और उर्दू विभाग के विद्यार्थी-विद्यार्थिनियों तथा प्राध्यापकों ने बड़ी संख्या में उपस्थिति दर्ज कराई।

अध्यक्षीय भाषण में सईद परवेज़ ने युवा पीढ़ी में पुस्तक वाचन के प्रति घटती रुचि और मोबाइल के अत्यधिक उपयोग पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पुस्तक वाचन से विचारशक्ति, ज्ञान और व्यक्तित्व विकास को बढ़ावा मिलता है। मुख्य अतिथि जावेद शौकत अज़ीज़ अंसारी ने विद्यार्थियों को परिश्रम, निरंतरता, अनुशासन और नैतिक मूल्यों का महत्व समझाया।

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उर्दू लाइब्रेरी (सोर्सः सोशल मीडिया)
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स्वतःस्फूर्त भागीदारी से चर्चासत्र सफल

जावेद अंसारी (आकाशवाणी) ने उर्दू लाइब्रेरी के विविध शैक्षणिक एवं साहित्यिक उपक्रमों की जानकारी देते हुए पिछले दो वर्षों से चल रहे सूचना केंद्र के बारे में विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। इस केंद्र के माध्यम से प्रतियोगी परीक्षाओं, सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक अवसरों की जानकारी उपलब्ध कराई जाती है। कार्यक्रम के आरंभ में दिवंगत ट्रस्टी मोहम्मद अज़हर मोहम्मद अकबर को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

श्री मज़हर मुआज़ शौक़ी ने उनकी सेवाओं को नमन किया। इसके बाद विद्यार्थियों के लिए प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित हुआ। प्रा. हसना कौसर, प्रा. नाज़िया मोहम्मद साबिर और प्रा. मसूद अहमद ने इस उपक्रम की सराहना की। कार्यक्रम का सूत्रसंचालन लाइब्रेरियन मो. आसिफ़ ने किया तथा आभार प्रदर्शन डॉ. एहतेशाम दानिश ने किया। विद्यार्थियों, शिक्षकों और शिक्षिकाओं की स्वतःस्फूर्त भागीदारी से चर्चासत्र सफल रहा।

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