एसटी महामंडल का बड़ा एक्शन: नासिक में निलंबित 12 अफसरों की जगह नई नियुक्तियां, महकमे में मचा हड़कंप
Nashik MSRTC ST Corporation: नासिक एसटी महामंडल ने निलंबन विवाद के बीच 12 निलंबित अधिकारियों की जगह नए अधिकारियों की पूर्णकालिक नियुक्ति कर दी है। इस फैसले से महकमे में हलचल तेज हो गई है।
- Written By: अंकिता पटेल
नासिक एसटी, निलंबन विवाद, (सोर्स- सोशल मीडिया)
Nashik MSRTC Suspension Row: नासिक महाराष्ट्र राज्य परिवहन महामंडल (एसटी) में 1 जुलाई से जारी निलंबन विवाद के बीच प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। महामंडल ने सभी 12 निलंबित अधिकारियों की जगह नए अधिकारियों की पूर्णकालिक नियुक्ति के आदेश जारी कर दिए हैं। निलंबन वापस लेने के बजाय सीधे नई नियुक्तियों ने महकमे में हड़कंप मचा दिया है।
नव नियुक्त अधिकारियों की सूची
प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, नासिक संभाग में निम्नलिखित अधिकारियों को तैनात किया गया है- विभागीय नियंत्रकः भगवान जगनोर (वर्धा से), विभागीय यातायात अधिकारीः दिलीप बंजारा (जलगांव से), क्षेत्रीय यांत्रिक अभियंताः प्रशांत वासकर (पुणे से) यांत्रिक अभियंताः प्रशांत पदमने (मुंबई से), लेखा अधिकारीः मिलिंद सांगले (धुलिया से), ऑडिट अधिकारीः लोचन गायधनी (अहिल्यानगर से, स्टोर विभागः वैशाली भंडारे (अकोला से), इगतपुरी डिपोः एजाज शेख (बोईसर से), पंचवटी डिपोः रितेश फुलपगारे (महाड से)।
एसटी महामंडल के इतिहास में इसे अब तक की सबसे कड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। महामंडल के भीतर चर्चा है कि यह कार्रवाई किसी वित्तीय हेरफेर के कारण नहीं, बल्कि मुंबई के एक पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई शिकायत और उससे जुड़ी आपसी रंजिश का परिणाम है।
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अधिकारियों का गिर सकता मनोबल
जहां प्रशासन इस कार्रवाई को आंतरिक अनुशासन और राजस्व बढ़ाने के प्रति कडाई का संदेश बता रहा है, वहीं यात्री संगठनों और स्थानीय स्तर पर इसके खिलाफ नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का मानना है कि बिना निष्पक्ष सुनवाई और अपना पक्ष रखने का मौका दिए एकतरफा कार्रवाई करना अनुचित है। इससे ईमानदार अधिकारियों का मनोबल गिरने की आशंका भी जताई जा रही है।
अनुशासन या प्रतिशोध ?
एसटी महामंडल के भीतर चल रही चर्चाओं ने इस पूरी कार्रवाई को एक बदले की भावना’ का रूप दे दिया है। 300 किलोमीटर दूर हाजिरी का नियम प्रशासन की नीयत पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। प्रशासन की इस कार्रवाई का असर दैनिक यात्री सेवाओं पर पड़ सकता है। यात्री संगठनों ने मांग की है कि निलंबित अधिकारियों की अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाए ताकि प्रशासनिक अस्थिरता का प्रभाव आम जनता पर न पड़े।
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अपील कार्यप्रणाली’ का दुरुपयोग
सामान्यतः निलंबन के बाद अधिकारियों को नजदीकी दफ्तर में हाजिरी देनी होती है, लेकिन इन अधिकारियों को अपने मुख्यालय से 300-350 किमी दूर छत्रपति शिवाजी नगर में रोज हाजिरी लगाने का कड़ा बंधन दिया गया है। कर्मचारी यूनियनों ने इसे ‘अनुशासन और अपील कार्यप्रणाली’ का दुरुपयोग बताया है। उनका आरोप है कि अधिकारियों को निशाना बनाकर उनका उत्पीड़न किया जा रहा है।
