चैट GPT से करते हैं इलाज, मानखुर्द-गोवंडी में 200 से अधिक फर्जी डॉक्टर मरीजों की जान से कर रहे खिलवाड़
Mumbai Fake Doctors Mankhurd Govandi: मुंबई के मानखुर्द और गोवंडी इलाके में 200 से अधिक फर्जी डॉक्टर यूट्यूब और चैट जीपीटी के सहारे मरीजों का इलाज कर रहे हैं।
- Written By: अनिल सिंह
मानखुर्द और गोवंडी में फर्जी डॉक्टरों का धड़ल्ले से चल रहा कारोबार (फोटो क्रेडिट-X)
Fake Doctors Mankhurd And Govandi: देश की सबसे अमीर बृहन्मुंबई महानगरपालिका के नाक के नीचे स्वास्थ्य व्यवस्था को वेंटिलेटर पर ला देने वाला एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मुंबई के एम-पूर्व वार्ड के अंतर्गत आने वाले गोवंडी, शिवाजी नगर और मानखुर्द चीता कैंप इलाके इस समय झोलाछाप और फर्जी डॉक्टरों (फर्जी ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’) के लिए सबसे सुरक्षित ठिकाने बन चुके हैं।
एक आधिकारिक रिपोर्ट और स्थानीय जांच के अनुसार, इन क्षेत्रों में वर्तमान में 200 से अधिक फर्जी डॉक्टर बिना किसी वैध मेडिकल डिग्री के धड़ल्ले से क्लिनिक चला रहे हैं और गरीब मरीजों की जान के साथ सरेआम खिलवाड़ कर रहे हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि इस गंभीर खतरे से जहां स्थानीय जनता में भारी आक्रोश है, वहीं बीएमसी के प्रशासनिक अधिकारी मामले से पूरी तरह पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं।
यूट्यूब और चैट जीपीटी के भरोसे चल रहा इलाज
विभिन्न पुलिसिया जांचों और स्थानीय खुफिया रिपोर्टों में जो खुलासा हुआ है, वह किसी के भी रोंगटे खड़े कर देने के लिए काफी है। इन इलाकों में डिस्पेंसरी (क्लिनिक) खोलकर बैठे कई स्वघोषित डॉक्टर महज आठवीं या दसवीं कक्षा पास हैं। इन्हें चिकित्सा विज्ञान का कोई व्यावहारिक या प्रामाणिक अनुभव नहीं है। ये शातिर लोग क्लिनिक के भीतर मरीजों के आते ही उनके लक्षणों को यूट्यूब पर सर्च करते हैं या फिर एआई टूल ‘चैट जीपीटी’ की मदद से दवाइयों के नाम खोजकर गंभीर बीमारियों का इलाज कर रहे हैं।
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बिना किसी वैध डिग्री के चल रही इन दुकानों पर प्रशासनिक लाचारी साफ दिखाई देती है। स्थानीय पुलिस का कहना है कि कानून की ढुलमुल व्यवस्था के कारण जब भी इन फर्जी डॉक्टरों को गिरफ्तार किया जाता है, तो ये कुछ ही दिनों में अदालत से जमानत पर रिहा हो जाते हैं और दोबारा उसी स्थान पर या नाम बदलकर नई दुकान खोल लेते हैं।
प्रशासन की ‘कुंभकर्णी नींद’ पर उठे सवाल
मानखुर्द-गोवंडी में इस बड़े रैकेट के सामने आने के बाद महानगरपालिका के स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जब इस संबंध में एम-पूर्व वार्ड के सहायक मनपा आयुक्त उज्जवल इंगोले से सीधा सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इस बात से साफ इनकार कर दिया कि मामला उनके संज्ञान में है। इंगोले ने अपना पक्ष रखते हुए कहा, “एम ईस्ट वार्ड में हमारी टीम अवैध अस्पतालों, फर्जी क्लिनिकों और बिना मान्यता प्राप्त स्कूलों पर लगातार दंडात्मक कार्रवाई कर रही है। हालांकि, जैसा कि दावा किया जा रहा है कि यहां 200 से अधिक फर्जी डॉक्टर प्रैक्टिस कर रहे हैं, यह वर्तमान में हमारे रिकॉर्ड में नहीं है। अगर किसी नागरिक या संस्था के पास इससे जुड़ी पुख्ता जानकारी या सूची है, तो कृपया हमारे साथ साझा करें, ताकि हम तत्काल संबंधित पुलिस स्टेशन में एफआईआर (FIR) दर्ज करा सकें।”
24 घंटे के भीतर लगाम लगाई जा सकती है
दूसरी तरफ, पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर प्रशासनिक सुस्ती पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि मनपा स्वास्थ्य विभाग के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों के कथित मूक संरक्षण और सुस्ती के कारण ही ये फर्जी डॉक्टर फल-फूल रहे हैं। बीएमसी की तरफ से मेडिकल रिपोर्ट आने में महीनों लग जाते हैं, जिससे एफआईआर दर्ज करने में देरी होती है या वो दर्ज ही नहीं हो पाती है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यदि स्वास्थ्य विभाग की औपचारिक रिपोर्ट का इंतजार किए बिना पुलिस को सीधे इन फर्जी क्लीनिकों पर छापा मारने और एफआईआर दर्ज करने का सीधा कानूनी अधिकार दे दिया जाए, तो इन पर 24 घंटे के भीतर लगाम लगाई जा सकती है।
‘नो योर डॉक्टर’ क्यूआर कोड मुहिम भी जमीन पर बेअसर; एसोसिएशन की सफाई
इस बीच, महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (MMC) ने इस तरह की धोखाधड़ी को जड़ से समाप्त करने और फर्जी डॉक्टरों की पहचान के लिए ‘नो योर डॉक्टर’ नामक एक आधुनिक क्यूआर कोड-बेस्ड सिस्टम की शुरुआत की थी। इस तकनीक के माध्यम से कोई भी सामान्य नागरिक क्लिनिक के बाहर लगे क्यूआर कोड को स्कैन करके डॉक्टर की असली डिग्री, उनका रजिस्ट्रेशन नंबर और सत्यता को तुरंत वेरिफाई कर सकता है। लेकिन जागरूकता की कमी के कारण जमीन पर इसका असर बहुत ही कम दिख रहा है, जिसका सीधा खामियाजा गरीब और अशिक्षित मरीजों को अपनी जान गंवाकर भुगतना पड़ रहा है।
इस मुद्दे पर यूनाइटेड मेडिकल एसोसिएशन (UMA) के सचिव डॉ. जाहिद खान ने स्पष्ट किया, “हमारी एसोसिएशन के अंतर्गत 300 से अधिक पूरी तरह से प्रामाणिक और रजिस्टर्ड डॉक्टर आते हैं। महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल के सभी सख्त दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए हमारे सभी वैध सदस्यों ने अपनी-अपनी डिस्पेंसरी के बाहर ‘नो योर डॉक्टर’ क्यूआर कोड अनिवार्य रूप से लगा दिया है, ताकि जनता असली और नकली का फर्क आसानी से समझ सके।” प्रशासन की इस लापरवाही के बीच अब देखना होगा कि मुंबई पुलिस और बीएमसी इन 200 फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ कब संयुक्त अभियान शुरू करती है।
