गणेश-गौरी उत्सव में बदलती परंपरा, प्रसाद और पकवानों की कीमतों ने तोड़ी गृहिणियों की कमर
गणेशोत्सव में भगवान को भोग अर्पित करने की परंपरा चली आ रही है। लेकिन आज कल वर्किंग वूमन के कल्चर के कारण घर पर प्रसाद बनाना काफी मुश्किल हो गया है।
- Written By: अपूर्वा नायक
रेडीमेड प्रसाद (सौ. सोशल मीडिया )
Nashik News In Hindi: गणेश उत्सव के बाद गौराई का आगमन हो चुका है। इनके दौरान और भरी जिंदगी में, खासकर कामकाजी महिलाओं के लिए, घर पर सब कुछ बनाना मुश्किल होता कारण है कि पिछले कुछ सालों में तैयार प्रसाद (नैवेद्य) और भोजन की मांग काफी बढ़ गई है।
इस साल भी लेकिन बढ़ती महंगाई ने लोगों की खरीदारी को प्रभावित किया है। गृहिणी गणपति या गौरी के लिए बाहर से तैयार भीजन और नैवेद्य रहे हैं। थाली की कीमत 200 रुपए से शुरू कि कुछ लोग घर पर प्रसाद करते हैं और मेहमानों के लिए खाना मंगवाते हैं।
जबकि कुछ लोग सिर्फ प्रसादही मंगवाते हैं, बढ़ती महंगाई के कारण पालियों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है, जिससे ग्राहकों को सोच-समझकर खर्च करना पड़ रहा है। व्यापारी आकाश अंधारे ने कहा कि त्योहारों पर प्रसाद की मांग तो बड़ी है, लेकिन महंगाई के कारण ग्राहक संकोच कर रहे है।
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कई घरों में सदस्यों की संख्या कम होने से भी मांग पर असर पड़ा है। उनने कि दिवाली के पकवान और काली को मार थी, लेकिन वे कम बजन में बिके कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि होने से इन पकवानों की कीमतों पर सीधा असर पड़ा है।
महंगाई के कारण कम मात्रा में खरीदा
गृहिणी प्रज्ञा काकडे ने कहा है कि बाहर और घर के काम के चलते उन्होंने गौराई का प्रसाद बाहर से मगवाया, लेकिन बढ़ती महंगाई को देखते हुए कम मात्रा में ही खरीदा। उन्होंने महगे मोदक बाहर से खरीदने के बजाय घर पर ही बनाने की कोशिश की ताकि त्योहार का पूरा आनंद लिया जा सके।
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कम मात्रा में बिक रहा सामान
व्यापारी आकाश अंधारे ने बताया कि त्योहारी पर तैयार प्रसाद की मांग तो बढ़ी है, लेकिन महंगाई के कारण ग्राहक सोच-समझकर खरीदारी कर रहे हैं। वाई घरों में सदस्यों की संख्या कम होने से भी मांग में कमी आई है। दिवाली के पकवान जैसे लड्डू, चिवडा, करंजी, और चकली की मांग की, लेकिन दे वाम मात्रा में बिके, कच्चे माल की कीमतें बढ़ने से इन पकवानों की कीमती पर असर पड़ा है।
