दफ्तर में दीन की दावत या साजिश? अदालत ने की जमानत याचिका खारिज, नासिक कोर्ट ने कहा निदा खान की कस्टडी है जरूरी
Nashik Court News: नासिक कोर्ट ने TCS यौन शोषण और जबरन धर्मांतरण मामले में आरोपी निदा खान की अग्रिम जमानत अर्जी नामंजूर की। जानें क्या है 'हनीया' नाम का रहस्य और क्यों पुलिस को चाहिए निदा की कस्टडी।
- Written By: गोरक्ष पोफली
निदा खान की जमानत याचिका खारिज (एआई इमेज)
TCS Nashik Case Update: टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की नासिक यूनिट में सामने आए सनसनीखेज सेक्सुअल हैरेसमेंट और जबरन धर्मांतरण के मामले में मुख्य आरोपी निदा खान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। शनिवार को नासिक की एक सत्र अदालत ने निदा खान की अग्रिम जमानत याचिका (Anticipatory Bail) को सिरे से खारिज कर दिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के.जी. जोशी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए माना कि इस साजिश की तह तक जाने के लिए आरोपी की कस्टोडियल इंटेरोगेशन यानी पुलिस हिरासत में पूछताछ बेहद जरूरी है।
पुलिस और सरकारी वकील का मास्टर स्ट्रोक
सरकारी वकील अजय मिसर ने अदालत में एक ऐसी दलील पेश की जिसने मामले का रुख बदल दिया। उन्होंने कहा कि यह केवल छेड़छाड़ का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरी वित्तीय और अंतरराष्ट्रीय साजिश की बू आ रही है। पुलिस ने कोर्ट को बताया कि निदा खान के बैंक खातों और संपर्कों के तार मलेशिया और मालेगांव से जुड़े हो सकते हैं। इस विदेशी कनेक्शन की जांच के बिना सच्चाई सामने नहीं आएगी।
VIDEO | Maharashtra: “Nashik court refuses anticipatory bail to TCS employee Nida Khan in alleged sexual harassment- forcible conversion case”, says public prosecutor Ajay Misar. (Full video available on PTI Videos – https://t.co/n147TvrpG7) pic.twitter.com/ykyXtUFc3Y — Press Trust of India (@PTI_News) May 2, 2026
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हनीया नाम का रहस्य और सोशल मीडिया का खेल
सुनवाई के दौरान पुलिस ने सबसे चौंकाने वाला खुलासा पहचान बदलने को लेकर किया। कोर्ट को बताया गया कि कैसे एक हिंदू पीड़िता का नाम बदलकर हनीया किया गया और उसके निजी सोशल मीडिया (इंस्टाग्राम) का इस्तेमाल धार्मिक एजेंडा फैलाने के लिए किया गया। पुलिस ने जोर देकर कहा कि आरोपी का फोन जब्त कर उसकी फॉरेंसिक जांच करना बहुत जरूरी है, जो केवल हिरासत में पूछताछ (Custodial Interrogation) से ही मुमकिन है।
Nashik court refuses anticipatory bail to TCS employee Nida Khan in alleged sexual harassment- forcible conversion case pic.twitter.com/O8WrfhbtMn — Press Trust of India (@PTI_News) May 2, 2026
बचाव पक्ष की नाकाम दलीलें
निदा खान के वकील राहुल कासलीवाल ने बचाव करते हुए कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप मनगढ़ंत हैं। उन्होंने तर्क दिया कि महाराष्ट्र में धर्मांतरण को लेकर कोई सख्त प्रतिबंधात्मक कानून (जैसे यूपी या एमपी में हैं) नहीं है, इसलिए इसे अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि निदा जांच में सहयोग करने को तैयार हैं, इसलिए उन्हें गिरफ्तार न किया जाए।
जज का कड़ा रुख
सभी दलीलों को सुनने के बाद जज के.जी. जोशी ने माना कि आरोपों की प्रकृति अत्यंत संवेदनशील और गंभीर है। कोर्ट ने कहा कि जब मामला किसी प्रतिष्ठित संस्थान के भीतर महिलाओं की सुरक्षा और जबरन धार्मिक प्रभाव डालने से जुड़ा हो, तो आरोपी को अग्रिम राहत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपी फिलहाल फरार है और जांच के कई महत्वपूर्ण पहलू अधूरे हैं, इसलिए जमानत की अर्जी खारिज की जाती है।
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राष्ट्रीय महिला आयोग की सक्रियता
इस मामले की गूंज अब दिल्ली तक पहुँच चुकी है। राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने मीडिया रिपोर्ट्स का स्वतः संज्ञान लेते हुए एक उच्च स्तरीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी में बॉम्बे हाई कोर्ट की सेवानिवृत्त जज साधना जाधव और पूर्व आईपीएस अधिकारी बी.के. सिन्हा जैसे दिग्गज शामिल हैं। यह कमेटी अगले 10 दिनों के भीतर नासिक यूनिट का दौरा कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी ताकि कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
निदा खान पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज है, जिसमें यौन उत्पीड़न और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब नासिक पुलिस की कार्रवाई और तेज होने की उम्मीद है।
