सिंहस्थ कुंभ मेले की बड़ी तैयारी: नासिक महानगरपालिका तपोवन में बनाएगी 180 MLD का अत्याधुनिक STP प्लांट!
Nashik Kumbh Mela 2027: सिंहस्थ कुंभ और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए नासिक के तपोवन में 180 MLD क्षमता का आधुनिक STP बनाया जा रहा है। इससे गोदावरी में शोधित जल छोड़ा जाएगा और प्रदूषण कम होगा।
- Written By: अंकिता पटेल
नासिक एसटीपी, तपोवन परियोजना, गोदावरी नदी,(सोर्सः सोशल मीडिया)
Godavari Sewage Treatment Plant: आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले, बढ़ती आबादी और भविष्य की जल प्रबंधन आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नासिक महानगरपालिका तपोवन में 180 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) क्षमता का अत्याधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित कर रही है। आधुनिक तकनीक से लैस इस परियोजना के शुरू होने के बाद गोदावरी नदी में उच्च गुणवत्ता वाला शोधित जल छोड़ा जाएगा। इससे नदी प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के साथ-साथ जल पुनः उपयोग को भी बड़ी गति मिलेगी।
पुरानी तकनीक से आधुनिक SBR तकनीक तक का सफर
वर्तमान में तपोवन में 78 एमएलडी और 52 एमएलडी क्षमता के दो सीवेज शोधन संयंत्र, कुल 130 एमएलडी क्षमता के साथ संचालित हैं। ये संयंत्र पुराने यूएएसबी (अपपली एनारोबिक स्लज ब्लैकेट) तकनीक पर आधारित है और उस समय की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाए गए थे।
लेकिन बढ़ती आबादी, बदलते पयर्यावरणीय मानकों और शहर के विस्तार को देखते हुए अब इनकी जगह एक ही परिसर में 180 एमएलडी क्षमता का आधुनिक संयंत्र स्थापित किया जा सा है। नई परियोजना में अत्याधुनिक सीवर्वेस्सिंग वैच रिएक्टर (एसबीआर) तकनीक के साथ डिस्क फिल्टर प्रणाली का उपयोग किया जाएगा।
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इससे सीवेज में मौजूद जैविक प्रदूषकों के साथ-साथ नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और सूक्ष्म ठोस कारणों को भी अधिक प्रभावी ढंग से अलग किया जा सकेगा। परिणामस्वरूप शोचित जल की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा और इसका उपयोग उद्योगी, उद्यानों, निर्माण कार्यों तथा जुन्य गैर प्रेगल आवश्यकताओं के लिए किया जा सकेगा।
स्काडा आधारित स्वचालित निगरानी और कुंभ की तैयारी
इस परियोजना की एक और विशेषता यह है कि पूरी प्रणाली स्काडा आधारित स्ववालित नियंत्रण व्यवस्था से संचालित होगी। जल प्रवाह, गुणवत्ता, ऊर्जा खपत् मशीनों की कार्यस्थिति और संभावित तकनीकी खराबियों की 24 घंटे रियल टाइम निगरानी की जाएगी।
इससे मानवीय हस्तक्षेप कम होगा, कार्यक्षमता बढ़ेगी और लगातार उब्य गुणवत्ता का सीवेज शोधन सुनिश्चित किया जा सकेगा।
परियोजना पूरी होने के बाद महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल के सभी पर्यावरणीय मानकों का पालन करते हुए केवल शोधित जल ही गोदावरी नदी में छोड़ा जाएगा, इससे नदी में अशोधित सीवेज का प्रवाह रुकेगा और प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आएगी, विशेष रूप से सिंहस्थ कुंभ मेले के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के लिए गोदावरी का जल अधिक स्वच्छ और सुरक्षित बनाए रखाने में यह परियोजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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जरूरतों को ध्यान में रखकर
यह परियोजना केवल वर्तमान नहीं, बल्कि अगले 25 वर्षों की आवश्यकताओं को देखते हुए विकसित की जा रही है। आधुनिक तकनीक, जल पुनः उपयोग और डिजिटल नियंत्रण प्रणाली के माध्यम से यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन और सतत विकास की दिशा में नासिक के लिए एक महत्वपूर्ण मील का फ्थर साबित होगी।
मनपा आयुक्त, मनीषा खत्री
