नाशिक : स्मार्ट सिटी कंपनी (Smart City Company) ने शहर में स्मार्ट पार्किंग (Smart Parking) शुरू करने के लिए ट्रायजेन कंपनी (Trigen Company) को एक सप्ताह का अल्टिमेटम दिया है। ऐसा न होने पर पार्किंग (Parking) का ठेका रद्द करने की चेतावनी भी दी गई है। शहर की सार्वजनिक यातायात को अनुशासन में लाने के लिए स्मार्ट सिटी कंपनी ने शहर में बनाए गए 33 ऑफस्ट्रीट और ऑनट्रीट पार्किंग धूल में तद्बिल हो गई है।
कोरोना की दूसरी लहर का असर कम होने के बाद ट्रायजेन कंपनी ने पार्किंग शुरू करने के बजाए महानगरपालिका के पास दो गुना शुल्क बढ़ोतरी और तीन वर्ष मुदद बढ़ोतरी की शर्त रखने से स्मार्ट सिटी कंपनी की समस्या बढ़ गई है। इस पार्श्वभूमी पर स्मार्ट सिटी कंपनी ने ठेकेदार ट्रायजेन को एक सप्ताह का अल्टिमेटम दिया है। शहर में पार्किंग की समस्या हल करने के लिए महानगरपालिका और स्मार्ट सिटी कंपनी ने पीपीपी तर्ज पर स्मार्ट पार्किंग प्रकल्प शुरू किया, जिसमें 28 ऑनस्ट्रीट, 5 ऑफस्ट्रीट पार्किंग शामिल है। इस पार्किंग व्यवस्थापन की जिम्मेदारी ट्रायजेन टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को दी गई है।
पहले चरण में 22 पार्किंग के लॉट्स उपलब्ध किए गए। महानगरपालिका के साथ हुए अनुबंध के तहत कंपनी को 10 वर्ष शुल्क वसूली सहित बाइक के लिए प्रति घंटा 5 रुपए तो चार पहिया वाहन के लिए 20 रुपए दर निश्चित किया गया है। लेकिन कोरोना महामारी के चलते पार्किंग सुविधा शुरू होते ही बंद हो गई। इसलिए ठेकेदार ने आर्थिक नुकसान होने की बात कर दुपहिया के लिए प्रति घंटा 15 रुपए तो चार पहिया के लिए प्रति घंटा 30 रुपए शुल्क बढ़ोतरी के साथ 3 वर्ष मुदद बढ़ोतरी देने की मांग की। महानगरपालिका ने देढ़ वर्ष मुदद बढ़ाने का प्रस्ताव कुछ हद तक मान्य किया है, लेकिन शुल्क बढ़ोतरी का विरोध किया है। इसलिए ठेकेदार ने पार्किंग शुरू न करने की बात स्पष्ट की है। इसलिए ठेकेदार को स्मार्ट सिटी कंपनी ने नवंबर में नोटिस जारी की थी, लेकिन ठेकेदार ने नोटिस की ओर ध्यान नहीं देने से एक सप्ताह का अल्टिमेटम दिया है।
महानगरपालिका के टोइंग की शर्त मान्य करने से शहर में निजी वाहनों के लिए टोइंग की कार्रवाई शुरू की गई है। लेकिन ट्रायजेन कंपनी ने महानगरपालिका के प्रस्तपा की ऊंगली की है। महानगरपालिका ने प्रथम दुपहिया वाहन के लिए प्रति घंटा 15 रुपए तो चार पहिया वाहन के लिए 30 रुपए शुल्क का प्रस्ताव पारित किया था। लेकिन नागरिकों द्वारा विरोध होने के बाद यह दर बढ़ोतरी चरण-चरण में देने का निर्णय लिया था। ठेकेदारों के इस प्रस्ताव की ओर ऊंगली दिखाने से समस्या बढ़ गई है।