ANIS Nashik News: संजय शिरसाट के ‘आत्मा’ वाले बयान पर बढ़ा विवाद: अंनिस ने दी खुली चुनौती, इस्तीफे की मांग
ANIS Nashik Protest: छत्रपति संभाजीनगर मनपा की इमारत को लेकर मंत्री संजय शिरसाट के विवादित बयान पर नासिक में बवाल। अंनिस ने इसे असंवैधानिक बताते हुए जादू-टोना विरोधी कानून का उल्लंघन करार दिया।
- Written By: गोरक्ष पोफली
संजय शिरसाट व महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति का लोगाे (सोर्स: सोशल मीडिया)
ANIS Attacks On Sanjay Shirsat: छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका (मनपा) की प्रशासनिक इमारत को लेकर राज्य के सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट द्वारा दिए गए एक बयान ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। मंत्री शिरसाट ने हाल ही में एक चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि मनपा की यह इमारत कब्रिस्तान की जमीन पर बनी है, जिसके कारण वहां ‘आत्माएं’ दिखाई देती हैं। उन्होंने यहाँ तक कहा कि इस कथित डरावने माहौल की वजह से कर्मचारियों के मन में भय व्याप्त है और उन्हें वहां काम करने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
नासिक में ‘अंनिस’ का तीखा प्रहार और इस्तीफे की मांग
मंत्री के इस बयान की नाशिक में ‘महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति’ (अंनिस) ने कड़ी निंदा की है। अंनिस के पदाधिकारियों ने इस बयान को पूरी तरह से अवैज्ञानिक, अतार्किक और प्रगतिशील महाराष्ट्र की छवि को धूमिल करने वाला बताया है। समिति ने शिरसाट को खुली चुनौती देते हुए कहा है कि वे अपने दावों को साक्ष्यों के आधार पर सिद्ध करें। ‘अंनिस’ ने रोष व्यक्त करते हुए मांग की है कि समाज में डर और अंधविश्वास फैलाने वाले ऐसे व्यक्ति को तत्काल अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। समिति के अनुसार, इस तरह के बयान देना एक संवैधानिक अपराध के समान है।
जादू-टोना विरोधी कानून और संवैधानिक मूल्यों का उल्लंघन
महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के राज्य कार्याध्यक्ष संजय बनसोडे ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इसे बेहद गंभीर मामला बताया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र देश का वह पहला राज्य है जिसने कड़ा ‘जादू-टोना विरोधी कानून’ पारित किया है। विडंबना यह है कि जिस सामाजिक न्याय विभाग के पास इस कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी है, उसी विभाग के मंत्री स्वयं ऐसी बातें कर रहे हैं जो जादू-टोना विरोधी कानून के मूल्यों को ताक पर रखने जैसी हैं। बनसोडे ने जोर देकर कहा कि एक मंत्री से हमेशा तर्क, विज्ञान और साक्ष्यों के आधार पर बोलने की अपेक्षा की जाती है, न कि काल्पनिक डरों को बढ़ावा देने की।
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प्रगतिशील महाराष्ट्र की छवि के लिए बताया घातक
अंनिस ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र को शाहू, फुले और आंबेडकर की विचारधारा वाला राज्य माना जाता है, जहाँ वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी जाती है। संजय शिरसाट द्वारा सरकारी इमारत में आत्माओं के होने की बात कहना न केवल कर्मचारियों को डराने वाला है, बल्कि यह समाज के आम नागरिकों को भी अंधविश्वास की ओर धकेलता है।
समिति ने सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने और यह सुनिश्चित करने की मांग की है कि भविष्य में कोई भी जन-प्रतिनिधि इस तरह के अवैज्ञानिक दावे न करे। इस विवाद के बाद अब राजनीतिक गलियारों में भी शिरसाट के इस बयान की आलोचना शुरू हो गई है।
