ईंधन बचाने के लिए ऑनलाइन पढ़ाई के सुझाव का नासिक में विरोध; विद्यार्थी समूह ने शिक्षा विभाग को लिखा पत्र

Nashik Online Classes: ईंधन संकट के बीच स्कूल-कॉलेज ऑनलाइन करने के सुझाव का नासिक के विद्यार्थी समूह ने कड़ा विरोध किया है। उन्होंने शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर भौतिक कक्षाएं जारी रखने की मांग की।
A Nashik student group strongly opposed the proposal to shift schools online to save fuel amid global crisis, writing to the education department to save students' future.
नासिक ऑनलाइन (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Nashik Online Classes Opposition Jivan Keshari Marathi Vidyarthi Samuh: पश्चिम एशिया के संकट और ईंधन की बढ़ती कीमतों की पृष्ठभूमि में स्कूल-कॉलेजों को ऑनलाइन मोड पर ले जाने की चर्चाओं ने राज्य के शैक्षणिक हलकों में खलबली मचा दी है। नासिक स्थित 'जीवन केशरी मराठी विद्यार्थी समूह' ने इस विचार का कड़ा विरोध करते हुए महाराष्ट्र शासन के स्कूली शिक्षा विभाग को एक पत्र लिखा है।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब 11 मई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वडोदरा में एक संबोधन के दौरान पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और अमेरिका-ईरान संघर्ष का हवाला दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि राष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की बचत करने के लिए शिक्षण संस्थान ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करें और कार्यालय 'वर्क फ्रॉम होम' अपनाएं। हालांकि इसे राष्ट्रीय मितव्ययिता के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन विद्यार्थी संगठन ने इसे छात्रों के भविष्य के लिए घातक बताया है।

नासिक विद्यार्थी समूह के प्रमुख प्रसाद भालेकर द्वारा हस्ताक्षरित इस ज्ञापन में ऑनलाइन शिक्षा के प्रति कई गंभीर चिंताएं व्यक्त करते हुए कहा कि कोविड-19 के दौरान ऑनलाइन शिक्षा के कारण छात्रों के शैक्षणिक, शारीरिक और मानसिक विकास पर दीर्घकालिक विपरीत प्रभाव पड़ा था।

ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे होंगे अधिक प्रभावित

राज्य के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के लाखों छात्रों के पास स्मार्टफोन, हाई-स्पीड इंटरनेट या घर पर पढ़ाई के लिए उपयुक्त माहौल नहीं है, जिससे शिक्षा में बड़ी खाई पैदा हो गई है। स्कूल का भौतिक वातावरण केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि समाजीकरण, खेलकूद और टीम भावना विकसित करने का केंद्र होता है, जो ऑनलाइन संभव नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 21-A के तहत 6 से 14 वर्ष के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अधिकार है, जो केवल भौतिक स्कूल में ही सुनिश्चित की जा सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईंधन बचाने के लिए बच्चों की शिक्षा को दांव पर लगाना एकमात्र उपाय नहीं है।

छात्रों और शिक्षकों को साइकिल के उपयोग के लिए प्रोत्साहित करें। नजदीकी स्कूल में पैदल जाने की आदत विकसित करें। स्कूलों के लिए इलेट्रिक बसों की व्यवस्था करना और सार्वजनिक इलेक्ट्रिक परिवहन को मजबूत करें। सरकार तत्काल एक आधिकारिक अधिसूचना जारी करे कि कक्षा 1 से 12वीं तक की कोई भी कक्षा ऑनलाइन नहीं चलाई जाएगी।

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