आचार संहिता का हवाला देकर नासिक मनपा की सभा 10 मिनट में स्थगित, 122 में से केवल 12 सदस्य ही रहे उपस्थित
Nashik NMC News: नासिक मनपा की महासभा आचार संहिता के नाम पर महज 10 मिनट में स्थगित। 122 में से सिर्फ 12 नगरसेवक पहुंचे, बुनियादी मुद्दों पर चर्चा न होने से नागरिकों में भारी आक्रोश।
- Written By: रूपम सिंह
नासिक मनपा (सोर्स- सोशल मीडिया)
Nashik NMC General Body Meeting: नासिक मनपा की मासिक सर्वसाधारण सभा आचार संहिता का हवाला देकर महज दस मिनट में स्थगित कर दी गई, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। सभा में कुल 33 महत्वपूर्ण विषयों को कार्यसूची में शामिल किया गया था, लेकिन किसी भी मुद्दे पर चर्चा किए बिना उसे समाप्त कर दिया गया, जिसे नागरिक अपने अधिकारों की अनदेखी मान रहे हैं।
कोरम की कमी और जनप्रतिनिधियों की बेरुखी
122 सदस्यों वाली इस महत्वपूर्ण महासभा में केवल 12 सदस्य ही उपस्थित थे। नासिक शहर के विकास और बुनियादी समस्याओं पर चर्चा करने के लिए बुलाई गई इस बैठक में जनप्रतिनिधियों की भारी अनुपस्थिति को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का मजाक माना जा रहा है।
प्रशासन द्वारा आचार संहिता को ढाल बनाकर सभा को स्थगित करने पर विवाद गहरा गया है। जानकारों के अनुसार, विधान परिषद चुनाव की आचार संहिता नई योजनाओं की घोषणाओं और वित्तीय निर्णयों पर रोक लगाती है, लेकिन पानी, सड़क, स्वच्छता, स्वास्थ्य और यातायात जैसी नागरिक समस्याओं पर चर्चा करने पर कोई प्रतिबंध नहीं होता। इस संदर्भ में बिना चर्चा के सभा को समाप्त कर देना प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े करता है।
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सभागार में चर्चा जनहित की नहीं, ‘भ्रमण’ की !
सभा के स्थगित होने के बाद की तस्वीर और भी निराशाजनक रही। सभागृह से बाहर निकलने के बजाय जनप्रतिनिधि महापौर कक्ष और सभागार में अनौपचारिक चर्चाओं में मशगूल दिखे। चर्चा का केंद्र नागरिकों की समस्याएं नहीं, बल्कि पर्यटन और आपसी चुटकुलों तक सीमित रहा। दिनकर पाटिल और सुरेश पाटिल जैसे वरिष्ठ नगरसेवकों
सहित अन्य सदस्यों की मौजूदगी में हुई इस अनौपचारिक महफिल ने साफ कर दिया कि जनहित के मुद्दों को फिलहाल राजनीतिक प्राथमिकता नहीं मिल रही है। शहर आज पानी की किल्लत, जर्जर सड़कों और अतिक्रमण जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे समय में नासिक मनपा अधिनियम की अनिवार्यता पूरी करने के लिए महज ‘कागजी खानापूर्ति’ करना और चर्चा से बचने का प्रयास करना सीधे तौर पर नागरिकों के प्रति संवेदनहीनता को दर्शाता है।
