नागपुर मनपा में सत्ता पक्ष को भनक लगे बिना एजी कंपनी ने बदला नाम; नई पहचान के साथ गुपचुप शुरू किया कचरा संकलन

Nagpur Waste Collection Contract: नागपुर मनपा में कचरा संकलन ठेकों को लेकर विवाद फिर सामने आया है। AG एन्वायरो का नाम बदलकर नई कंपनी के रूप में काम शुरू करने पर प्रशासनिक जानकारी को लेकर सवाल उठे हैं।
AG Company changed its name without the ruling party at the Nagpur Municipal Corporation getting wind of it; quietly commenced garbage collection under the new identity.
नागपुर मनपा में कचरा संकलन ठेकों को लेकर विवाद(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Nagpur Municipal Corporation: नागपुर सिटी की मूलभूत आवश्यकताओं को अत्याधुनिक और पुख्ता करने के लिए निजी कम्पनियों को जिम्मेदारियां सौंपने का सिलसिला गत 15 वर्षों से मनपा में जारी है। इसी क्रम में घरों से कचरा संकलन के लिए 12 वर्ष पहले कनक रिसोर्सेस कम्पनी को ठेका दिया गया था। कम्पनी का कामकाज सटीक नहीं होने के कारण बाद में इसे बदलकर 10 जोन में 5-5 जोन के लिए 2 कम्पनियों की नियुक्ति की गई।

एजी एन्वायरों और बीवीजी इंडिया नामक कम्पनी को ठेका आवंटित कर बकायदा एग्रीमेंट किया गया। हालांकि इन दोनों कम्पनियों के काम को लेकर भी लंबे समय से जनप्रतिनिधियों में नाराजगी जताई जा रही है। इसके बाद इन कम्पनियों को भी बदलने पर पक्ष-विपक्ष में सहमति भी हुई।

आश्चर्यजनक यह कि सत्ता पक्ष के तमाम प्रयासों के बावजूद कम्पनियां तो नहीं बदलीं, अलबत्ता स्वच्छता अभियान के तहत कचरा मुक्ति में जुटे सत्ता पक्ष को जानकारी दिए बिना ही एजी नामक कम्पनी ने नाम बदलकर एन्थोनी वेस्ट हैंडलिंग सेल लि. नाम से मनपा में कचरा संकलन भी शुरू कर दिया।

सदन में प्रस्ताव देने की जरूरत नहीं

सूत्रों के अनुसार एजी एन्वायरों कम्पनी को मनपा के जोन नंबर 1 से लेकर जोन नंबर 5 के दायरे में आने वाले हिस्सों से कचरा संकलन का ठेका आवंटित किया गया था। जानकारों की मानें तो ठेका आवंटित करते समय मनपा और कम्पनी के बीच एग्रीमेंट किया गया।

हालांकि इस एग्रीमेंट में किसी तरह का बदलाव तो नहीं किया गया किंतु कम्पनी द्वारा दिए गए नए नाम को प्रशासन की ओर से हरी झंडी भी प्रदान कर दी गई। इस संदर्भ में पूछे जाने पर प्रशासन का मानना है कि कम्पनी का नाम बदलने का प्रस्ताव सदन के विचारार्थ लाने की आवश्यकता नहीं है। इसे प्रशासन के स्तर पर ही सुलझाया जा सकता है। कम्पनी ने केवल नाम बदला है जबकि उसमें किसी तरह का बदलाव नहीं है।

सत्ता पक्ष को ही चुनौती

मनपा में सत्ता पक्ष की उपस्थिति के बावजूद प्रशासन द्वारा अपने स्तर पर लिए जा रहे इस तरह के फैसलों को लेकर अब गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं की जा रही हैं।

जानकारों की मानें तो यह पूरा मामला एक कम्पनी के अधिकारों को दूसरी कम्पनी को हस्तांतरित करने जैसा है। ऐसे में यह नीतिगत फैसला होना चाहिए किंतु इसे भी दरकिनार किया जा रहा है। यह एक तरह से सत्ता पक्ष को चुनौती देने जैसा है।

बहरहाल मनपा का सत्ता पक्ष गोवा टूर में व्यस्त है। उसकी वापसी के बाद मसले पर गहमागहमी होने की संभावना जताई जा रही है।

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