कुंभ मेले पर मंत्री नितेश राणे का विवादित बयान, बोले- केवल हिंदू ही लगा सकेंगे स्टॉल
Nitesh Rane ने कुंभ मेले को लेकर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मेले में केवल हिंदू व्यापारियों को ही स्टॉल लगाने की अनुमति मिलनी चाहिए। उनके बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
- Written By: अपूर्वा नायक
नितेश राणे (सौ. सोशल मीडिया एक्स )
Nitesh Rane Controversial Statement: महाराष्ट्र के मत्स्य व्यवसाय एवं बंदरगाह विकास मंत्री नितेश राणे ने कुंभ मेले को लेकर एक बयान दिया है, जिस पर चर्चा तेज हो गई है।
नाशिक में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि कुंभ मेले में केवल हिंदू व्यापारियों को ही स्टॉल लगाने की अनुमति दी जानी चाहिए। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस शुरू हो गई है।
जानकारी के अनुसार नाशिक में ‘हिंदू हित रक्षा’ संगठन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में हिंदू व्यावसायिक कामगारों की सूची का विमोचन किया गया। इसी कार्यक्रम में संबोधन के दौरान मंत्री नितेश राणे ने यह बात कही। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि कुंभ मेले में केवल हिंदू व्यापारियों को ही स्टॉल लगाने दिया जाए।
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हिंदुओं से खरीदारी करने की अपील
कार्यक्रम में बोलते हुए मंत्री राणे ने कहा कि हिंदुओं को हिंदुओं से ही खरीदारी करनी चाहिए और इस विचार का वह समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि कुंभ मेले में गैर-हिंदू व्यापारी स्टॉल लगाते हुए दिखाई दें तो इस पर आपत्ति जताई जानी चाहिए। उनके इस बयान ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच चर्चा को और तेज कर दिया।
हिंदू हित रक्षा, नाशिक यांच्या वतीने आयोजित करण्यात आलेल्या "हिंदूंचा रुपया हिंदूलाच" या संमेलनाला आज उपस्थित राहिलो. याप्रसंगी दैनंदिन जीवनात आवश्यक असणाऱ्या विविध क्षेत्रातील शेकडो हिंदू कारागीर, लघु उद्योजक व व्यावसायिकांची माहिती असलेल्या विशेष यादीचे प्रकाशन व लोकार्पण… pic.twitter.com/TYrok4Efk5 — Nitesh Rane (@NiteshNRane) March 14, 2026
रमजान के स्टॉल का भी दिया उदाहरण
अपने संबोधन के दौरान उन्होंने रमजान के दौरान लगने वाले खाद्य स्टॉलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि ऐसे स्टॉलों पर हिंदू विक्रेता नजर नहीं आते। उन्होंने कहा कि जब दूसरे समुदाय अपने धार्मिक आयोजनों में अपने लोगों को प्राथमिकता देते हैं, तो हिंदू समाज भी ऐसा क्यों नहीं कर सकता।
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बयान के बाद चर्चा तेज
मंत्री के इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इस पर प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। कुछ लोग इसे धार्मिक आधार पर भेदभाव से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ समर्थक इसे धार्मिक आयोजन में समुदाय की भागीदारी से जोड़कर देख रहे हैं। फिलहाल इस बयान को लेकर बहस जारी है।
