75 साल बाद नासिक सिंहस्थ कुंभ में अद्भुत त्रिखंड योग, तंत्र साधना और सिद्धियों के लिए उमड़ेंगे देशभर के साधक

Nashik Simhastha Kumbh: नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ में 75 साल बाद दुर्लभ 'त्रिखंड योग' बन रहा है। इस दिव्य संयोग में श्री महाविद्या साधना और तंत्र सिद्धि के लिए देशभर के तांत्रिक व साधक आएंगे।
Trimbakeshwar Temple
नासिक का त्र्यंबकेश्वर मंदिरसोर्स: सोशल मीडिया
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Nashik Simhastha Kumbh Trikhand Yog: धर्म और अध्यात्म की पावन नगरी नासिक-त्र्यंबकेश्वर में आयोजित होने वाला सिंहस्थ कुंभ मेला इस बार श्रद्धालुओं और साधकों के लिए अत्यंत विशेष होने जा रहा है। 31 अक्टूबर 2026 से शुरू होकर 24 जुलाई 2028 तक चलने वाले इस महाकुंभ में एक ऐसा दुर्लभ और अलौकिक धार्मिक संयोग बनने जा रहा है, जो पूरे 75 वर्षों के बाद लौट रहा है। ज्योतिषविदों और धर्मशास्त्रियों के अनुसार, इस बार सिंहस्थ कुंभ के दौरान 'त्रिखंड योग' का निर्माण हो रहा है। इससे पूर्व यह अद्भुत योग वर्ष 1956 के कुंभ मेले में बना था।

शास्त्रों में त्रिखंड योग को एक ऐसा स्वर्णिम और महाफलदायी कालखंड माना गया है, जिसमें सामान्य जप, तप और मंत्र अनुष्ठान भी शीघ्र अति शीघ्र सिद्ध हो जाते हैं। यही कारण है कि इस अति-दुर्लभ अवसर का आध्यात्मिक लाभ उठाने के लिए अभी से देश के कोने-कोने से साधु-संतों, औघड़ों और तंत्र साधकों ने त्र्यंबकेश्वर नगरी में अपना ठिकाना खोजना शुरू कर दिया है।

कामाख्या से लेकर अखाड़ों तक, तांत्रिकों और औघड़ों की हलचल

तंत्र विद्या और जादू टोना के लिए देशभर में विख्यात मां कामाख्या की नगरी से आए एक तांत्रिक ने इस संबंध में बताया कि जब कुंभ का आयोजन होता है उसे दौरान देश भर के सभी पंथ संप्रदाय को मानने वाले साधु संन्यासी और बैरागी हवन पूजा पाठ अपने-अपने आराध्य देव को आकर्षित करने कहीं राम कथा कहानी श्रीमद् भागवत कहीं गीता तो कहीं वेद मंत्रो का उच्चारण होता रहता है।

इन सब के बीच में जहां का हर पल दसों दिशाओं में मंत्रों की गूंज से गुंजायमान हो वहां पर किसी भी साधक को अपने मंत्र को सिद्ध करने और सिद्धि प्राप्त करने में कोई विशेष कठिनाई नहीं आती।

यही कारण है कि इस बार के नासिक सिंहस्थ कुंभ में त्रिखंड योग के सौभाग्य को अपनी साधना के परिपूर्ण या सिद्धि प्राप्त के लिए देश भर के तांत्रिक और औघड कुंभ के दौरान तमकेश्वर में किसी न किसी जगह पर एकांतवास में रहकर भागवत भजन या साधना करते जरूर नजर आएंगे।

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त्रिखंड योग में श्री विद्या की साधना का विशेष महत्व

बता दें कि श्री महाविद्या की साधना एक ऐसी वर्तमान काल के लिए साधना है जिसकी साधना और सिद्धि हर कोई करना चाहता है क्योंकि कहा जाता है कि सुख समृद्धि और ईश्वर प्राप्ति का एकमात्र रास्ता श्री महाविद्या की साधना से ही मिलता है। वैसे तो इस श्री महाविद्या के साधन बहुत सारे पंत और संप्रदाय के साथ-साथ गृहस्थ लोग भी हैं, लेकिन इस प्राचीन विद्या का गुरु मंत्र आज भी केवल शंकराचार्य संप्रदाय के विद्वानों के द्वारा ही प्राप्त करने का प्रावधान है।

जब त्रिखंड योग में श्री महाविद्या के एक-एक मंत्र का जाप करने से ही सिद्धि प्राप्त करने का उल्लेख है तो इस बात का भी अनुमान है कि देश भर के लाखों नहीं करोड़ों साधक श्री महाविद्या के मंत्र को सिद्ध करने के लिए इस दौरान त्र्यंबकेश्वर की नगरी में जरूर आएंगे।

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त्र्यंबकेश्वर जैसा कोई नगर नहीं इस धारा में

भारत भूमि विद्वानों ऋषि मुनियों और देवताओं की पावन भूमि मानी जाती है लेकिन वही वेद पुराणों में यह भी उल्लेख है कि त्र्यंबकेश्वर जैसी कोई जगह इस पूरे विश्व के मानस पटल पर नहीं है, जहां पर एक साथ एक ही शिवलिंग में त्रिदेव ब्रह्मा विष्णु और महेश मौजूद हो।

अधिकतर लोगों का कहना है कि जब पालन करता सृष्टि रचयिता और संघार करता जहां पर विराजमान हो वहां पर हर मनोकामना अपने आप पूर्ण हो जाती है, और यह तो त्रिखड योग का शुभ अवसर है। इसीलिए इस बात की भी संभावना है कि नासिक और त्र्यंबकेश्वर का यह कुंभ अपने सारे पिछले रिकॉर्ड को ध्वस्त करके एक नया कीर्तिमान बनाएगा।

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