

Nashik Simhastha Kumbh: अनादि काल से नासिक में कुंभमेला संपन्न होता आ रहा है, और सनातन हिंदू संस्कृति में देवी-देवताओं से लेकर विभिन्न अवसरों पर वस्त्रों के ध्वज फहराने का विशेष महत्व रहा है। 2015 के कुंभमेले में मुख्य धर्मध्वज और श्री गंगागोदावरी मंदिर के ध्वज का निर्माण 'देवाज्' इस दालान द्वारा सफलतापूर्वक किया गया था। इसी पूर्व अनुभव के आधार पर आगामी 2026,27,28 के सिंहस्थ कुंभमेले के लिए धर्म ध्वजा की एक आकर्षक और वैशिष्ट्यपूर्ण संकल्पना निश्चित की गई है।
यहां पर सबसे उल्लेखनीय तथ्य भी है कि नासिक और तमकेश्वर में जहां अलग-अलग संत संप्रदाय की संतों के रुकने और स्नान की परंपरा है इस तरह धर्म ध्वज का स्वरूप भी अलग अलग है और नासिक में धर्म ध्वज का विश्लेषण बताते हुए नासिक पुरोहित संघ के अध्यक्ष चंद्रशेखर पंचाछरी ने बताया कि धर्म ध्वज की स्थापना के पहले नगर की परिक्रमा भी की जाएगी जिसका मुख्य उद्देश्य नासिक शहर के लोगों को सिंहस्थ कुंभ का निमंत्रण देना माना जाता है।
दोनों धर्म ध्वजों का रंग भगवा है, जो 'प्रखर वैराग्य' का प्रतीक माना जाता है। अपने पास मौजूद संपत्ति, ज्ञान, गुण और अनुभव पर केवल हमारा ही अधिकार न हो, बल्कि उसका उपयोग समाज में सर्वत्र होना चाहिए। यही विचार वैराग्य कहलाता है। यह ध्वज उच्च कोटि के रेशमी धागों से बुना हुआ और कम वजन का होगा। ध्वज के चारों ओर जरी की लेस लगाई जाएगी।
ध्वज के नीचे पीतल की हल्की और मधुर आवाज करने वाली घंटियां लगाई जाएंगी। मुख्य धर्म ध्वज में 15 और उपमुख्य ध्वज में 9 घंटियां होंगी। इसके अलावा मुख्य धर्मध्वज पर घुंघरू और 12 रेशमी गोंडे होंगे, जबकि श्री गंगागोदावरी मंदिर के ध्वज पर 9 घंटियां, 3 घुंघरू और 6 रेशमी गोंडे होंगे।
सभी शुभ चिन्ह जरी के कपड़े, आरी वर्क और प्राकृतिक रंगों का उपयोग करके तैयार किए जाएंगे। यहां पर विशेष उल्लेखनीय तथ्य भी है कि त्रयंबकेश्वर में यह धर्म ध्वजा तांबे पर बनाई जाती है जिसमें 9 घटिया होती हैं और घुंघरू और गोड़े ड़े का प्रावधान नहीं है।
मुख्य धर्मध्वज और श्री गंगा-गोदावरी धर्मध्वज पर दर्शाया गया अमृत कुंभ, गोदामाता के अमरत्व और मुक्ति का प्रतीक है। श्री और ॐ चिन्ह: मुख्य और गंगागोदावरी धर्मध्वज पर अंकित 'श्री' और 'ॐ' हिंदू धर्म के पवित्र शुभ चिन्ह हैं, जो चारों और सकारात्मकता दर्शाते हैं।रेशीम गोंडे, घुंगरू और घंटा: मुख्य धर्मध्वज के रेशमी गोंडे सामाजिक एकता और संघ शक्ति के द्योतक हैं, जबकि घुंगरू और घंटा अंतर नाद तथा ब्रह्म नाद के प्रतीक हैं। श्री गंगागोदावरी धर्मध्वज के गोंडे भी सामाजिक एकता व संघ शक्ति को दर्शाते हैं।
मुख्य धर्मध्वज मुख्य रूप से त्रिकोण या आयताकार होता है। त्रिकोण स्वर्ग, मृत्यु और पाताल का स्वरूप दर्शाता है; वहीं आयत सिंहस्थ के प्रमुख देवता बृहस्पति और परम पावनी जगदोद्धारक गोदावरी के प्रवाह का प्रतीक है। महाकुंभ पर्वकाल में धर्म ध्वज विशेष रूप से आयताकार होता है।
मुख्य धर्मध्वज पर बना सिंह शूरवीरता का प्रतीक और देवगुरु बृहस्पति का पवित्र वाहन है। सिंहस्थ पर्वकाल में गोदावरी के अमृत स्नान से देश और धर्म के संरक्षण के लिए हम भी सिंह बनें, यह दिव्य संदेश यह सिंह देता है। वहीं, श्री गंगा-गोदावरी धर्मध्वज में दर्शाई गई मगरमच्छ (मगर) गंगा-गोदावरी का मुख्य वाहन और दीर्घायु का प्रतीक है।मुख्य और गंगागोदावरी धर्मध्वज पर दिखाए गए चंद्र और सूर्य काल के प्रतीक हैं। यह इस बात का प्रतीक है कि जब तक चंद्र और सूर्य रहेंगे, तब तक कुंभमेला यह महापर्व आयोजित होता रहेगा।
गुरु का सिंह राशि में प्रवेश होते ही इस धर्म ध्वजारोहण का संपूर्ण नियोजन श्री गंगागोदावरी पंचकोठी पुरोहित संघ, सिंहस्थ समिति, शासन, प्रशासन और समस्त नासिककरों के सहयोग से किया जाता है। आगामी सिंहस्थ में 31 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12बजकर 12 मिनट गुरु का सिंह राशि में प्रवेश हो रहा है, और ठीक इसी पावन वेला में रामकुंड में धर्म ध्वजारोहण संपन्न होगा।