नासिक जिला परिषद चुनाव पर टिकी नजरें, आरक्षण विवाद में फंसे चुनाव; 23 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट सुनवाई
Nashik Zilla Parishad: नासिक सहित 20 जिला परिषद चुनाव आरक्षण सीमा विवाद के कारण अटके हैं। 23 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद चुनाव की तारीखों पर स्थिति साफ होने की उम्मीद है।
- Written By: अंकिता पटेल
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Nashik District Council Elections: नासिक राज्य के 12 जिला परिषदों के चुनाव संपन्न होने के बाद अब शेष 20 जिला परिषदों के चुनाव कब घोषित होंगे, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं। इसमें नासिक जिले का भी समावेश है। आरक्षण सीमा (50% की मर्यादा) पार होने के मुद्दे के कारण ये चुनाव न्यायिक प्रक्रिया में फंस गए हैं।
इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय में 23 फरवरी 2026 को महत्वपूर्ण सुनवाई होनी है, जिसके बाद चुनाव की तारीखों को लेकर तस्वीर साफ होने की उम्मीद है। पिछले चार वर्षों से नासिक जिला परिषद पर प्रशासक शासन लागू है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के विकास कार्यों में जन्प्रतिनिधियों की भूमिका सीमित हो गई है।
सभी प्रमुख दल चाहते हैं कि जल्द चुनाव हों ताकि जनता के प्रतिनिधि सीधे विकास कार्यों से जुड़ सकें, जिला परिषद के साथ ही 15 तालुकों की पंचायत समितियों के चुनाव भी होने हैं, जो विधानसभा चुनावों के लिए ‘सेमीफाइनल’ माने जा रहे हैं।
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नई गट संरचनाः बढ़ी सदस्यों की संख्या
नई संरचना के अनुसार नासिक जिला परिषद के लिए अब 74 गट (निर्वाचन क्षेत्र) और पंचायत समितियों के लिए 148 गण निर्धारित किए गए हैं। उल्लेखनीय है कि 2017 में 73 गट थे, लेकिन ओझर और पिपलगांव बसवंत के नगरपालिका बनने से यह संख्या घटकर 71 रह गई थी। अब नए परिसीमन और पुनर्गठन के बाद यह बढ़कर 74 हो गई है, जिससे राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए है।
चुनाव का गणित एक नजर में
नासिक जिला परिषदः कुल 74 गट (पहले 71 थे)।
पंचायत समितिः कुल 148 गण।
वर्तमान स्थितिः आरक्षण मुद्दा (SC में सुनवाई लंबित)।
अपेक्षित समयः सुनवाई अनुकूल रही तो अप्रैल-मई या फिर सीधे मानसून के बाद।
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विस व महानगरपालिका के नतीजों का असर
जिले के 11 ग्रामीण विधानसभा क्षेत्रों के मतदाता इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाएंगे, हालिया महानगरपालिका चुनावों में जहां नासिक में भाजपा और मालेगांव में इस्लाम पाटी ने परचम लहराया, वहीं नगरपालिकाओं में शिवसेना (शिंदे गुट) का दबदबा दिखा, राष्ट्रवादी कांग्रेस के पास फिलहाल 7 विधायक है, जो जिले में अपनी पकड़ बनाए रखना चाहेंगे, अब जिला परिषद के ‘मिनी मंत्रालय’ की चाबी किसके हाथ लगती है। यह सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद शुरू होने वाले चुनावी दंगल में तय होगा।
