अमरावती की ‘लाइफलाइन’ पर लगा ताला: 6 महीने से बंद है मुख्य रेलवे पुल, जनप्रतिनिधियों के दावे निकले हवा-हवाई!
Amravati Railway Bridge Closure: 6 महीने से बंद है शहर की 'लाइफलाइन', जनप्रतिनिधियों के आश्वासन निकले खोखले। रेलवे पुल के नवनिर्माण में देरी से शहरवासियों में भारी रोष।
- Written By: प्रिया जैस
अमरावती रेलवे पुल बंद (सौजन्य-नवभारत)
Rajkamal Railway Overbridge: अमरावती शहर के मध्य स्थित व्यस्ततम रेलवे पुल को जर्जर अवस्था के चलते नागरिकों के यातायात के लिए बंद किए हुए 6 माह बीत गए हैं। उस समय पुल के नवनिर्माण को लेकर जनप्रतिनिधियों ने बड़ी-बड़ी बातें की थीं। वस्तुस्थिति यह है कि आज इस पुल से यातायात पूरी तरह बंद हो जाने से शहर दो भागों में विभाजित हो गया है।
इसका सीधा असर व्यापार, सामाजिक कार्यक्रम, आवाजाही व अन्य कार्यों पर पड़ा है। अब पुल का निर्माण कब होगा, यह कोई स्पष्ट नहीं बता पा रहा है। शहरवासियों के लिए लाइफलाइन कहे जाने वाले इस पुल की समस्या अधर में छोड़ दी गई है। इसके लिए शासन व प्रशासन दोनों ही जिम्मेदार माने जा रहे हैं।
दरारें दिखीं, आनन-फानन में बंद किया गया पुल
उल्लेखनीय है कि गत 25 अगस्त से राजकमल जयस्तंभ, रेलवे स्टेशन मार्ग तथा रुख्मिणी नगर की ओर जाने वाले इस पुल से राहगीरों, छोटे-बड़े वाहनों सहित आवागमन पूरी तरह बंद कर दिया गया था। कुछ दिनों बाद यहां एक दीवार खड़ी कर दी गई, ताकि कोई आ-जा न सके। पुल के मध्य तथा रेलवे स्टेशन के ऊपरी हिस्से में स्थित स्लैब के नीचे दरारें नजर आई थीं।
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बड़ी दुर्घटना की आशंका को लेकर हंगामा मचा था। प्रशासन ने तत्काल इसे बंद करने का निर्णय लिया। अचानक यातायात बंद होने से पूरे शहर की ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा गई। आज भी ट्रैफिक समस्या जस की तस बनी हुई है। त्योहारों के दौरान शहर में भारी जाम की स्थिति बन जाती है।
नेताओं के दावे ठंडे बस्ते में
उस समय सांसद डॉ. अनिल बोंडे, पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले, विधायक सुलभा खोडके, विधायक रवि राणा सहित अन्य नेताओं ने सरकार से तत्काल निधि लाकर काम शुरू कराने का दावा किया था। किंतु अब तक इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ है। नागरिकों ने मान लिया है कि पुल बनने में शायद वर्षों लग सकते हैं और वे मजबूरन शहर का लंबा चक्कर लगाकर आवागमन कर रहे हैं।
चुनाव में मुद्दा गायब
इन 6 महीनों के दौरान नगर परिषद और मनपा के चुनाव भी हुए। चुनाव प्रचार के दौरान नेताओं ने आपसी आरोप-प्रत्यारोप में समय बिताया, लेकिन शहर की यातायात, साफ-सफाई व अन्य महत्वपूर्ण समस्याओं को दरकिनार कर दिया। पुल बंद होने से व्यापारियों को भी नुकसान हुआ है। अनेक व्यापारियों ने अपने व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की शिकायत की है।
रेलवे आवागमन जारी, मरम्मत भी हुई
वस्तुस्थिति यह है कि रेलवे स्टेशन के ऊपरी भाग स्थित स्लैब में दरारें आने के बावजूद पुल के नीचे से रेलवे का आवागमन एक भी दिन नहीं रोका गया। स्टेशन से आज भी नियमित ट्रेनें समय पर चल रही हैं। पुल के नीचे स्लैब की कुछ जंग लगी सलाखों और दरारों की रेलवे प्रशासन ने अभियंताओं की सलाह से मरम्मत करा ली है। इस संबंध में स्पष्टीकरण भी दिया गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि पुल की जर्जर स्थिति को लेकर प्रशासन ने पुनः तकनीकी जांच कराई है या नहीं।
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1963 में बना पुल, संरचना पर उठे सवाल
- वर्ष 1963 में निर्मित इस पुल के मध्य भाग, यानी रेलवे लाइन के ऊपर वाले हिस्से में केवल स्लैब है। अन्य चार उतारों में रेत, गिट्टी, बोल्डर और सीमेंट का मिश्रण है।
- पुल के दोनों ओर बड़े पत्थर लगाए गए हैं। इन हिस्सों पर अत्यधिक दबाव आने पर किसी एक भाग के ढहने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।
- कई वर्ष पूर्व अंबापेठ क्षेत्र में एक छोटा पुल आंशिक रूप से ढहा था, जिसकी मशीनों से सीमेंट ग्राउटिंग कर मरम्मत की गई थी। तब से अब तक इस पुल पर कोई बड़ी घटना नहीं हुई।
- शहरवासियों का मानना है कि प्रशासन ने जिम्मेदारी से बचने के लिए बिना ठोस तकनीकी जांच के जल्दबाजी में पुल बंद कर दिया। जनप्रतिनिधियों को इस पर गंभीरता से जांच कर आगे का निर्णय लेना चाहिए।
– नवभारत लाइव पर अमरावती से जितेंद्र दोशी की रिपोर्ट
