किसानों के आंदोलन की प्रतीकात्मक फोटो (डिजाइन फोटो)
Yeola Farmers Protest: नासिक जिले के येवला में कृषि संकट और सरकारी नीतियों के खिलाफ किसानों का गुस्सा अब सड़कों पर उतरने लगा है। सोमवार को येवला तहसील स्थित राजापुर में किसानों ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। रास्ता रोको आंदोलन के कारण येवला-नांदगांव राज्य मार्ग पर करीब पौने घंटे तक पहिए थमे रहे, जिससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
सुबह करीब 9:30 बजे राजापुर और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में किसान एकजुट होकर मुख्य मार्ग पर जमा हो गए। प्रदर्शनकारी किसानों ने ‘सातबारा कोरा होना ही चाहिए’ और ‘प्याज को अनुदान मिलना ही चाहिए’ जैसे गगनभेदी नारों के साथ सरकार के खिलाफ अपना रोष व्यक्त किया। इस आंदोलन के कारण यातायात पूरी तरह ठप्प हो गया, जिससे यात्रियों और मालवाहक वाहनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
आंदोलनकारी किसानों ने स्पष्ट किया कि वे अब केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होंगे। बाजार में प्याज के गिरते दामों को देखते हुए, किसानों ने मांग की है कि बेचे गए प्याज पर कम से कम 1500 रुपये प्रति क्विंटल का अनुदान दिया जाए। सरकार ने चुनाव से पहले किसानों को जो वादा किया था, उसे तत्काल प्रभाव से लागू कर किसानों को कर्जमुक्त किया जाए। पिछले कुछ समय से सरकारी मक्का खरीद केंद्र बंद पड़े हैं, इन केंद्रों को तुरंत शुरू करने की मांग की गई है।
आंदोलन के दौरान स्थिति तब तनावपूर्ण हो गई जब किसान इस बात पर अड़ गए कि जब तक शासन का कोई जिम्मेदार प्रतिनिधि मौके पर नहीं आता, वे रास्ता नहीं खोलेंगे। पुलिस उपनिरीक्षक पवार और उनकी टीम ने मौके पर पहुंचकर किसानों से चर्चा की और उन्हें कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए मनाया। अंततः, मंडल अधिकारी पूजा आठवले को ज्ञापन सौंपने के बाद किसानों ने अपना आंदोलन वापस लिया।
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किसान नेता अशोक आव्हाड और धर्मराज आलगट ने सरकार को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यह तो केवल एक ट्रेलर है। यदि सरकार ने जल्द ही कोई ठोस नीतिगत निर्णय नहीं लिया, तो आने वाले समय में पूरे जिले में उग्र आंदोलन छेड़ा जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह शासन की होगी। इस प्रदर्शन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि खेती की बढ़ती लागत और अनिश्चित बाजार भाव के कारण किसान समुदाय भारी मानसिक और आर्थिक दबाव में है।