एमएमसी चुनाव 2026( सोर्स: सोशल मीडिया )
Nagpur IMA Split Groups: नागपुर एक दशक के बाद होने जा रहे महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (एमएमसी) के चुनाव को लेकर डॉक्टरों के बीच माहौल गरमा गया है। सभी पैनल जीत के लिए समर्थन हासिल करने में जुटे हुए हैं।
इस बार मुकाबला इसलिए भी रोचक हो गया है क्योंकि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) तीन गुटों में बंट गया है। इस घंटवारे के साथ ही सभी गुट मूल आईएमए होने का दावा भी कर रहे हैं।
राज्य में पंजीकृत एलोपैथ डॉक्टरों के लिए यह चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है। 2016 में आखिरी चार चुनाव हुआ था। तब से यानी 10 वर्षों से चुनाव नहीं हुए, प्रशासक के भरोसे ही प्राधिकरण चलाया जा रहा है।
चुनाव के लिए 26 अप्रैल को मतदान होना है। कुल 9 सदस्यों के चुनाव के लिए इस बार 60 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें आईएमए के तीन अलग-अलग पैनल हैं। वहीं हीलिंग हैंड यूनिटी पैनल ने भी 9 उम्मीदवार उत्तारे हैं।
26 उम्मीदवार बिना किसी पैनल यानी स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ रहे हैं। चुनाव में राज्यभर में करीब 1.40 लाख डॉक्टर मतदान में हिस्सा लेंगे। डॉक्टरों में भी चुनाव को लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है।
उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल राज्य में चिकित्सा पेशे को विनियमित करने वाली एक वैधानिक संस्था है। इसका मुख्य कार्य डॉक्टरों का पंजीकरण, चिकित्सकीय नैतिकता और पेशेवर मानकों को बनाए रखना और मरीजों की सुरक्षा के लिए लापरवाही की शिकायतों की जांच करना है। यह महाराष्ट्र चिकित्सा परिषद अधिनियम, 1965 के तहत कार्य करती है।
एमएमसी में कुल 18 सदस्य होते हैं। इनमें 9 सदस्य चुनाव से और 9 में 5 राज्यपाल मनोनीत जबकि 4 सदस्यों में हेल्थ संचालक, डीएमईआर संबालक, आयुर्वेद संचालक, हेल्थ यूनिवर्सिटी प्रतिनिधि का समावेश होता है। 9 सदस्यों में से ही अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का वचन किया जाता है।
आईएमए में हुए विभाजन से इस बार स्थिति में बदलाव हुआ है। सभी पैनल खुद को मूल संगठन का होने का दावा कर रहे हैं। ऑफिशियल आईएमए पैनल’ की भाजपा से जुड़ी ‘वैद्यकीय आघाड़ी’ का समर्थन मिलने की बात कही जा रही है। वहीं दूसरा है ‘आईएमए मेंबर्स पैनल’, जिसे आईएमए के 14 पूर्व अध्यक्षों और वरिष्ठ सदस्यों का समर्थन प्राप्त है।
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यही वजह है कि प्रचार के वक्त भी खींचातानी देखी जा रही है। सभी पैनलों का प्रचार तेज हो गया है। एक ओर जहां गर्मी अपना असर दिखा रही है ती दूसरी ओर प्रचार और समर्थन की गर्माहट भी बढ़ गई है।
सभी जिलों में आईएमए सभागृह, मेडिकल कॉलेजों के साथ ही पृथक रूप से डॉक्टरों से मिलकर समर्थन हासिल करने लिए जद्दोजहद जारी है। उम्मीदवारों की बढ़ती संख्या ने भी चुनाव को रोचक बना दिया है।