Nashik: त्र्यंबकेश्वर-घोटी मार्ग के लिए जमीन अधिग्रहण नोटिस, किसानों और महंत में हड़कंप
Nashik - Triyambakeshwar से घोटी मार्ग चौड़ीकरण के लिए केंद्र ने भूमि अधिग्रहण नोटिस जारी किया है। किसानों और महंत बिंदू महाराज ने सरकार के इस फैसले का विरोध जताया है।
- Written By: अपूर्वा नायक
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
Nashik News In Hindi: आगामी सिंहस्थ-कुंभमेले की पृष्ठभूमि पर, नासिक शहर को कनेक्टिविटी देने वाले महत्वपूर्ण त्र्यंबकेश्वर से घोटी तक के महामार्ग का चौड़ीकरण किया जाना है।
इसी सिलसिले में, केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इस 51.97 किलोमीटर लंबे मार्ग पर पड़ने वाले किसानों और व्यवसायियों को भूसंपादन (भूमि अधिग्रहण) की नोटिस जारी कर दी है।
नासिक से त्र्यंबकेश्वर रोड के अवैध निर्माणों को हटाने की कार्रवाई अभी पूरी भी नहीं हुई है कि यह नई नोटिस आ गई है, जिससे संबंधित लोगों में गहरा हड़कंप मच गया है। यह मार्ग त्र्यंबकेश्वर (पेगलवाड़ी) से घोटी तक 51.97 किलोमीटर लंबा होगा और श्रावण का फेरीमार्ग भी इसी सड़क से गुजरता है।
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यह सड़क पेगलवाड़ी, पहिने, सापगाँव, आंबोली, आहुली, भावली आदि गाँवों को जोड़ेगी। सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय ने इस संबंध में नोटिस 14 अक्टूबर 2025 को प्रकाशित की थी, जो अब जमीन मालिकों को प्रत्यक्ष रूप से प्राप्त हुई है।
कानूनी पेंच और केंद्र का हस्तक्षेप
यह भूसंपादन NH 160 (A) मार्ग के 53.5 से 105.47 किलोमीटर भाग में किया जाएगा। केंद्र सरकार की यह अधिसूचना होने के कारण, राज्य सरकार के अधिकारियों को इसमें किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। जमीन मालिकों को अब या तो सीधे जमीन देनी होगी या इस पर आपत्ति (हरकत) दर्ज करानी होगी।
महंत बिंदू महाराज ने न्यायालय जाने की तैयारी की
- त्र्यंबकेश्वर से घोटी मार्ग पर भूसंपादन की नोटिस मिलते ही पेगलवाड़ी स्थित बिदूधाम आश्रम के महंत डॉ। बिदू महाराज ने को भूसंपादन उप जिलाधिकारी के पास पहली आपत्ति दर्ज कराई।
- डॉ बिंदू महाराज ने बताया कि उन्हें आश्रम को नोटिस प्राप्त हुई है और वे जमीन देने का तीव्र विरोध करते हैं। चूंकि यह केंद्र सरकार का उपक्रम है और राज्य सरकार हस्तक्षेप नहीं कर सकती, इसलिए उन्होंने सीधे न्यायालय में याचिका दायर करने की बात कही है।
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कुंभमेला की तैयारियां और भूमि की तात्कालिक जरूरत
इस चौड़ीकरण का मुख्य लक्ष्य सिंहस्थ कुंभमेले के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के लिए सुचारू परिवहन व्यवस्था प्रदान करना है। यह सड़क नासिक और त्र्यंबकेश्वर के बीच यात्रा को तेज और सुरक्षित बनाएगी। चूंकि नासिक-त्र्यंबकेश्वर धार्मिक और पर्यटन के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, यह चौड़ीकरण भविष्य की यातायात आवश्यकताओं को भी पूरा करेगा। हालांकि, इस तात्कालिक जरूरत ने कई किसानों और छोटे व्यवसायियों के सामने अपनी आजीविका खोने का संकट खड़ा कर दिया है। किसानों और जमीन मालिकों के बीच मुआवजे की दर और पुनर्वास को लेकर भी चिंता का माहौल है, जिसे लेकर वे कानूनी विकल्प तलाश रहे हैं।
