नासिक TCS केस में पुलिस का बड़ा एक्शन; 2000 पन्नों की दूसरी चार्जशीट दाखिल, खुलेंगे कई बड़े राज
Nashik TCS Case Second Chargesheet Filed 2026: नासिक टीसीएस यौन उत्पीड़न और धर्म परिवर्तन मामले में पुलिस ने 2000 पन्नों की दूसरी चार्जशीट कोर्ट में की दाखिल।
- Written By: अनिल सिंह
नासिक पुलिस की SIT ने नासिक टीसीएस मामले में कोर्ट में सौंपी विस्तृत चार्जशीट (फोटो क्रेडिट-X)
Nashik TCS Case Second Chargesheet: नासिक के टीसीएस कॉर्पोरेट परिसर में महिलाओं के साथ हुए इस कथित दुर्व्यवहार और धार्मिक प्रताड़ना के मामले ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा था। मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में दर्ज 8 मामलों में वर्ष 2026 के दौरान भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई थीं। इन मामलों में कार्यस्थल पर महिला सहकर्मियों का यौन उत्पीड़न करना, छेड़छाड़, आपराधिक धमकी देना और किसी की धार्मिक आस्था का जानबूझकर अपमान करने जैसे बेहद संगीन आरोप शामिल हैं।
विशेष जांच दल (SIT) ने तकनीकी और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर इस 2000 पन्नों की दूसरी चार्जशीट को तैयार किया है। इससे पहले भी पुलिस इस मामले में 1500 पन्नों की एक प्राथमिक चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर चुकी है। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भले ही चार्जशीट दाखिल कर दी गई हो, लेकिन इस मामले की परतें इतनी गहरी हैं कि एसआईटी अभी भी नए साक्ष्य जुटाने के लिए पूरक जांच जारी रखे हुए है।
मुख्य आरोपियों के खिलाफ नासिक की अदालत में दाखिल हुआ आरोप पत्र
नासिक TCS केस और प्रताड़ना मामले में पुलिस ने जिन मुख्य आरोपियों के खिलाफ शिकंजा कसा है, उनके नाम इस चार्जशीट में प्रमुखता से शामिल किए गए हैं। आरोपियों में राजा रफीक मेमन, शाह रुख हुसैन शौकत कुरैशी, अश्विनी अशोक चैनानी, तौसिफ बिलाल अत्तार, शफी भिकन शेख, दानिश एजाज शेख, निदा एजाज खान और आसिफ आलम अंसारी शामिल हैं। इन सभी पर पद का दुरुपयोग कर महिला कर्मचारियों को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप है।
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देवलाली कैंप मामले में लगीं एससी-एसटी एक्ट की कड़ी धाराएं
इस पूरे विवाद में देवलाली कैंप पुलिस स्टेशन में दर्ज अपराध संख्या 156/2026 को कानूनी रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस विशिष्ट मामले में पीड़ित महिला की पृष्ठभूमि को देखते हुए पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के अलावा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की विशेष धाराएं भी जोड़ी हैं। इस कानून के शामिल होने के कारण आरोपियों के लिए कानूनी राह और अधिक कठिन हो गई है और पुलिस को इस मामले में कड़ी सजा दिलाने की उम्मीद है।
आरोपियों को जेल में ही कटना होगा वक्त, पूरक चार्जशीट की तैयारी तेज
अदालत ने मामले की संवेदनशीलता, गवाहों को प्रभावित करने की आशंका और पुलिस द्वारा पेश किए गए दस्तावेजी सबूतों को ध्यान में रखते हुए सभी आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। इसका मतलब है कि मुकदमे की सुनवाई पूरी होने तक आरोपियों को जेल की सलाखों के पीछे ही रहना होगा। पुलिस आयुक्त संदीप कर्णिक के मार्गदर्शन में एसआईटी की टीमें अब मामले के वित्तीय लेन-देन और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच कर रही हैं, ताकि आने वाले समय में एक और मजबूत पूरक चार्जशीट पेश की जा सके।
